Himachal: दिल्ली पुलिस को रोकने के मामले की हो जांच, दोषी अफसरों पर भी हो कार्रवाई; भाजपा ने उठाई मांग
भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में लोक भवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मिला।
विस्तार
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कथित हस्तक्षेप के मामले को लेकर भाजपा ने गुरुवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। नेता विपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में लोक भवन पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम की केंद्र सरकार के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने, मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। राज्यपाल से मुलाकात के बाद जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून के शासन और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप कर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित एआई मिट-2026 के दौरान यूथ कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों ने कथित रूप से अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इशारे पर किया गया और बाद में संबंधित लोगों को हिमाचल में शरण दी गई। जयराम ने कहा कि इस मामले में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आरोपी हिमाचल सदन में ठहराए गए और कमरों की बुकिंग मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से कराई गई। उन्होंने कहा कि यह संगठित संरक्षण का संकेत है। नेता विपक्ष ने बताया कि दिल्ली पुलिस को सूचना मिलने पर टीम रोहड़ू के चांशल वैली क्षेत्र में पहुंची, जहां से सौरभ सिंह (अमेठी), अरवाज (कानपुर) और सिद्धार्थ (मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि हिमाचल से स्थायी संबंध न होने के बावजूद ये लोग यहां कैसे पहुंचे और क्या उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मपुर पहुंचने पर दिल्ली पुलिस को रोका गया और रात 8:11 बजे उनके खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कर दी गई, जबकि पुलिस के पास वैधानिक दस्तावेज, सीजर रिपोर्ट और न्यायालयीन आदेश मौजूद थे। मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रांजिट रिमांड दिए जाने के बावजूद पुलिस टीम को आगे बढ़ने से रोका गया और वाहन जब्त करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि करीब 24 घंटे तक दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने रही, जो संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। प्रतिनिधिमंडल में विधायक विनोद कुमार, बलबीर वर्मा, जीत राम कटवाल, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, प्रदेश पदाधिकारी कुसुम सदरेट, कर्ण नंदा, रमा ठाकुर, सुदीप महाजन, जिला अध्यक्ष केशव चौहान, संजय सूद, मंडल अध्यक्ष रजीत पंडित, संजीव चौहान शामिल रहे।
हिमाचल में घोटने नहीं देंगे लोकतंत्र का गला : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र का गला घोंटने नहीं दिया जाएगा। गृह मंत्रालय की शह पर दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की अनदेखी कर गिरफ्तारियां की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर यह सब हो रहा है। धर्माणी ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है। सभी को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का अधिकार है। यूएस ट्रेड डील एकतरफा है। इससे भारत का नुकसान हुुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता भी शर्ट उतारकर प्रदर्शन कर चुके हैं। शांति प्रिय राज्य हिमाचल में केंद्र सरकार जानबूझकर माहौल खराब कर रही है। हिमाचल पुलिस ने कानून के तहत काम किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता हिमाचल के प्रति हमेशा अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। 2023 की आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से मांगी गई मदद में भाजपा ने समर्थन नहीं किया। हिमाचल प्रदेश को आरडीजी बंद होने पर भी भाजपा नेताओं ने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के लिए पहले पार्टी के हित हैं, फिर प्रदेश हित। कांग्रेस पहले प्रदेश हित देखती है फिर पार्टी हित। इससे पहले भी प्रदेश में चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए हरियाणा पुलिस को साथ लाकर विधानसभा का गेट तोड़ा गया था।
इंटर स्टेट अरेस्ट के नियमों का पालन जरूरी : शांडिल
हिमाचल और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि इंटर स्टेट अरेस्ट को लेकर जो नियम हैं, उनका पालन होना चाहिए था। दिल्ली पुलिस को हिमाचल पुलिस के साथ सहयोग करना चाहिए था। इंटर स्टेट मामलों में पहले भी कार्रवाई हुई है। गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसके लिए निर्धारित नियम है। असमंजस वाली कोई बात ही नहीं है। जब ट्रांजिट रिमांड मिल गया तो हमारी पुलिस ने कोई विरोध नहीं किया। इस मामले में ज्यादा समझदारी से काम लिया जाना चाहिए था।
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