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HPU News: हिमाचल विश्वविद्यालय में 275 शिक्षक पद खाली, पढ़ाई और शोध कार्य पर बढ़ा दबाव
Fri, 17 Jul 2026 11:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 11:56 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की वार्षिक गुणवत्ता रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालय में 626 स्वीकृत शिक्षक पदों में से 275 खाली हैं। वर्तमान में केवल 351 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की कमी से पढ़ाई, शोध, परीक्षा और अकादमिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। विश्वविद्यालय के 55 विभागों में 117 शैक्षणिक कार्यक्रम और 1,570 पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
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एचपीयू शिमला।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 626 स्वीकृत पद हैं, जबकि पूरे सत्र में केवल 351 पूर्णकालिक शिक्षक कार्यरत रहे। इसमें 275 पद रिक्त हैं।
यह खुलासा राज्यपाल कविंद्र गुप्ता की मंगलवार को जारी वार्षिक गुणवत्ता आश्वासन रिपोर्ट (एक्यूएआर) में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय में 55 विभागों के माध्यम से उच्च शिक्षा संचालित हो रही है। ऐसे में लगभग हर विभाग किसी न किसी स्तर पर शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लचीले पाठ्यक्रम, सतत मूल्यांकन और शोध आधारित शिक्षण को सफल बनाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन सबसे पहली आवश्यकता है। यह कमी ऐसे समय सामने आई है, जब विश्वविद्यालय बहुविषयक शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अकादमिक विस्तार का दावा कर रहा है।
रिपोर्ट में नए पाठ्यक्रमों, शोध गतिविधियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर जोर दिया गया है लेकिन पर्याप्त शिक्षकों के बिना इन लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। रिक्त पदों का असर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहता। विभागों में परीक्षा कार्य, शोध निर्देशन, प्रायोगिक कक्षाएं, परियोजनाएं, प्रशासनिक समितियां और विद्यार्थियों के शैक्षणिक मार्गदर्शन का अतिरिक्त दायित्व भी मौजूद शिक्षकों पर आ जाता है। इससे शिक्षण और शोध दोनों प्रभावित होने की आशंका रहती है। रिपोर्ट बताती है कि विश्वविद्यालय के 308 पूर्णकालिक शिक्षक पीएचडी धारक हैं। सात शिक्षकों को वर्ष के दौरान राज्य, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला है।
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यह खुलासा राज्यपाल कविंद्र गुप्ता की मंगलवार को जारी वार्षिक गुणवत्ता आश्वासन रिपोर्ट (एक्यूएआर) में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय में 55 विभागों के माध्यम से उच्च शिक्षा संचालित हो रही है। ऐसे में लगभग हर विभाग किसी न किसी स्तर पर शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लचीले पाठ्यक्रम, सतत मूल्यांकन और शोध आधारित शिक्षण को सफल बनाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन सबसे पहली आवश्यकता है। यह कमी ऐसे समय सामने आई है, जब विश्वविद्यालय बहुविषयक शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अकादमिक विस्तार का दावा कर रहा है।
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रिपोर्ट में नए पाठ्यक्रमों, शोध गतिविधियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर जोर दिया गया है लेकिन पर्याप्त शिक्षकों के बिना इन लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। रिक्त पदों का असर केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहता। विभागों में परीक्षा कार्य, शोध निर्देशन, प्रायोगिक कक्षाएं, परियोजनाएं, प्रशासनिक समितियां और विद्यार्थियों के शैक्षणिक मार्गदर्शन का अतिरिक्त दायित्व भी मौजूद शिक्षकों पर आ जाता है। इससे शिक्षण और शोध दोनों प्रभावित होने की आशंका रहती है। रिपोर्ट बताती है कि विश्वविद्यालय के 308 पूर्णकालिक शिक्षक पीएचडी धारक हैं। सात शिक्षकों को वर्ष के दौरान राज्य, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला है।
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विवि में पढ़ाए जा रहे 1570 पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय का शैक्षणिक ढांचा लगातार बढ़ा है। एक्यूएआर के अनुसार एचपीयू में 117 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं और इनके तहत 1570 पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं। यह व्यवस्था 55 विभागों में फैली हुई है। पाठ्यक्रमों की इतनी बड़ी संख्या बताती है कि प्रत्येक विभाग को नियमित रूप से विषय विशेषज्ञों, प्रयोगात्मक शिक्षण की आवश्यकता रहती है।
विश्वविद्यालय का शैक्षणिक ढांचा लगातार बढ़ा है। एक्यूएआर के अनुसार एचपीयू में 117 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं और इनके तहत 1570 पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं। यह व्यवस्था 55 विभागों में फैली हुई है। पाठ्यक्रमों की इतनी बड़ी संख्या बताती है कि प्रत्येक विभाग को नियमित रूप से विषय विशेषज्ञों, प्रयोगात्मक शिक्षण की आवश्यकता रहती है।