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Shimla News: मासिक धर्म के दर्द में रामबाण है संतुलित आहार-हल्का व्यायाम
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अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम
मॉडर्न नर्सिंग कॉलेज अनाडेल में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी डॉ. लीना ने छात्राओं को किया जागरूक
मासिक धर्म के दौरान हर चार घंटे बाद बदलें सेनेटरी पैड
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और हल्का व्यायाम मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द सहित अन्य समस्याओं को कम करने के लिए रामबाण है। इसे अपनाने से महिलाओं की परेशानी कम हो सकती है।
माॅडर्न नर्सिंग एवं बीएड कॉलेज अनाडेल में बुधवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. लीना शर्मा ने छात्राओं को महिला स्वास्थ्य को लेकर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना न केवल संक्रमण से बचाता है बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में शरीर की प्राकृतिक लय और संतुलन को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। मासिक धर्म के दौरान एक दिन में सेनेटरी पैड को कम से कम चार और ज्यादा से ज्यादा छह घंटों बाद बदल लेना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
मासिक धर्म के दौरान केमिकल वाली चीजों का प्रयोग कम करें। आयुर्वेद में लिखा है कि महिलाएं सफाई के लिए सुहागा और फिटकरी के पानी का प्रयोग कर सकती हैं। यदि कोई छात्रा लिकोरिया की बीमारी से ग्रसित हैं तो इसके लिए वह चावल को उबालने के बाद निकलने वाले पानी जिसे स्थानीय पीछ कहा जाता है, उसमें नमक मिलाकर सूप की तरह पी सकते हैं। इससे लिकोरिया बीमारी खत्म हो जाती है।
डॉ. लीना शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में बताया है कि सुबह के समय यदि ब्रह्म मुहूर्त में उठे तो आधे से ज्यादा बीमारियां ऐसे ही ठीक हो जाती हैं। छात्राओं को नियमित रूप से स्वच्छ कपड़ों का उपयोग करने और शरीर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। इस दौरान कॉलेज की एसएसटी प्रो. रेणू ने बताया कि अपराजिता कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को न केवल मासिक स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया। यह कार्यक्रम छात्राओं के लिए बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक साबित हुआ। इस अवसर पर एसएसटी प्रो निकिता, दीप्ति चौहान और पूजा तनेता मौजूद रहीं।
परिचर्चा
बीएड की छात्रा कृति ने पूछा कि मासिक धर्म के दौरान मेंस्ट्रुअल कप का प्रयोग करना सुरक्षित है या नहीं। इस पर डॉ. शर्मा ने बताया कि इसे उपयोग करने का सही तरीका आना चाहिए। यह तभी सुरक्षित होता है अगर हर बार इस्तेमाल के बाद मेंस्ट्रुअल कप को ठीक से साफ किया जाए नहीं तो यह जलन पैदा कर सकता है।
छात्रा आस्था शर्मा ने कहा कि मासिक स्वच्छता जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा होना समाज के सकारात्मक बदलाव का संकेत है। इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए ताकि छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती रहें।
नेहा ने कहा कि बहुत सी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बरतने वाली स्वच्छता के बारे में पता नहीं होता जिससे वह गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी मिली है।
स्वाति ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से हमें पता चला की स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी अच्छी नींद लेना है। इसके अलावा आयुर्वेद में बताए नियमित आहार, शरीर को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के उपायों के बारे में भी जानकारी मिली।
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मॉडर्न नर्सिंग कॉलेज अनाडेल में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी डॉ. लीना ने छात्राओं को किया जागरूक
मासिक धर्म के दौरान हर चार घंटे बाद बदलें सेनेटरी पैड
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और हल्का व्यायाम मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द सहित अन्य समस्याओं को कम करने के लिए रामबाण है। इसे अपनाने से महिलाओं की परेशानी कम हो सकती है।
माॅडर्न नर्सिंग एवं बीएड कॉलेज अनाडेल में बुधवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. लीना शर्मा ने छात्राओं को महिला स्वास्थ्य को लेकर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना न केवल संक्रमण से बचाता है बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में शरीर की प्राकृतिक लय और संतुलन को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। मासिक धर्म के दौरान एक दिन में सेनेटरी पैड को कम से कम चार और ज्यादा से ज्यादा छह घंटों बाद बदल लेना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
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मासिक धर्म के दौरान केमिकल वाली चीजों का प्रयोग कम करें। आयुर्वेद में लिखा है कि महिलाएं सफाई के लिए सुहागा और फिटकरी के पानी का प्रयोग कर सकती हैं। यदि कोई छात्रा लिकोरिया की बीमारी से ग्रसित हैं तो इसके लिए वह चावल को उबालने के बाद निकलने वाले पानी जिसे स्थानीय पीछ कहा जाता है, उसमें नमक मिलाकर सूप की तरह पी सकते हैं। इससे लिकोरिया बीमारी खत्म हो जाती है।
डॉ. लीना शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में बताया है कि सुबह के समय यदि ब्रह्म मुहूर्त में उठे तो आधे से ज्यादा बीमारियां ऐसे ही ठीक हो जाती हैं। छात्राओं को नियमित रूप से स्वच्छ कपड़ों का उपयोग करने और शरीर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। इस दौरान कॉलेज की एसएसटी प्रो. रेणू ने बताया कि अपराजिता कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को न केवल मासिक स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया। यह कार्यक्रम छात्राओं के लिए बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक साबित हुआ। इस अवसर पर एसएसटी प्रो निकिता, दीप्ति चौहान और पूजा तनेता मौजूद रहीं।
परिचर्चा
बीएड की छात्रा कृति ने पूछा कि मासिक धर्म के दौरान मेंस्ट्रुअल कप का प्रयोग करना सुरक्षित है या नहीं। इस पर डॉ. शर्मा ने बताया कि इसे उपयोग करने का सही तरीका आना चाहिए। यह तभी सुरक्षित होता है अगर हर बार इस्तेमाल के बाद मेंस्ट्रुअल कप को ठीक से साफ किया जाए नहीं तो यह जलन पैदा कर सकता है।
छात्रा आस्था शर्मा ने कहा कि मासिक स्वच्छता जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा होना समाज के सकारात्मक बदलाव का संकेत है। इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए ताकि छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती रहें।
नेहा ने कहा कि बहुत सी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बरतने वाली स्वच्छता के बारे में पता नहीं होता जिससे वह गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी मिली है।
स्वाति ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से हमें पता चला की स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी अच्छी नींद लेना है। इसके अलावा आयुर्वेद में बताए नियमित आहार, शरीर को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के उपायों के बारे में भी जानकारी मिली।