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Himachal: कैबिनेट बैठक में कल मंजूर होगी सीबीएसई पाठ्यक्रम की गाइडलाइन, 125 स्कूलों में मिलेगी सुविधा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 18 Jan 2026 02:55 PM IST
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सार

प्रदेश में अब 117 नहीं, 125 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। सोमवार को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इन स्कूलों को लेकर गाइडलाइन मंजूर होगी। 

CBSE curriculum guidelines to be approved in cabinet meeting tomorrow, facility to be provided in 125 schools
सीबीएसई। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में अब 117 नहीं, 125 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। सोमवार को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इन स्कूलों को लेकर गाइडलाइन मंजूर होगी। पहले 117 सरकारी स्कूलों को चयन किया गया था। अब आठ और स्कूलों ने भी संबंद्धता के लिए आवेदन कर दिया है। सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के चयन के लिए परीक्षा करवाने या ना करवाने पर भी सोमवार को कैबिनेट बैठक में फैसला होगा। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के चयनित सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम में तब्दील किया जाना है।

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सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के चयन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि सरकार ने बीते दिनों परीक्षा के माध्यम से ही शिक्षकों का चयन करने का फैसला लिया है लेकिन इसका विरोध भी लगातार जारी है।
ऐसे में अब कैबिनेट इस बात पर फैसला लेगी कि शिक्षकों के चयन के लिए अलग से परीक्षा करवाई जाए या मौजूदा शिक्षकों की तैनाती मानकों के अनुसार की जाए। 

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शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एससीईआरटी सोलन में बैठक 20 को होगी
 प्रदेश के विद्यार्थियों को अपने राज्य के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और विशिष्ट पहचान से स्कूल स्तर पर ही रूबरू कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूली पाठ्यक्रम में हिमाचल के इतिहास को शामिल करने की दिशा में औपचारिक पहल करते हुए 20 जनवरी को एससीईआरटी सोलन में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक होगी। बैठक में पाठ्यक्रम की रूपरेखा, विषय-वस्तु और कक्षा-बार प्रस्तुति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। वर्ष 2027 के शैक्षणिक सत्र से स्कूल पाठ्यक्रम में यह बदलाव लागू करने की योजना है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम में हिमाचल के इतिहास, लोक संस्कृति, परंपराओं, खानपान, लोक कलाओं और विख्यात व्यक्तित्वों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और राज्य के योगदान को भी समझ सकें। विभाग का मानना है कि स्थानीय इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों में राज्य के प्रति अपनापन, गर्व और सांस्कृतिक चेतना विकसित होगी। समीक्षा बैठक में विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और एससीईआरटी के अधिकारियों की भागीदारी रहेगी। इनके सुझावों के आधार पर पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि सामग्री रोचक, तथ्यात्मक और विद्यार्थियों की उम्र के अनुरूप हो। 

सीबीएसई संबद्धता का स्वागत,  अलग काडर मंजूर नहीं : स्कूल प्रवक्ता संघ
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने राज्य सरकार की ओर से सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने के निर्णय का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि अलग उप काडर के गठन पर आपत्ति है। सरकार का सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के लिए अलग उप काडर बनाने का प्रस्ताव है। प्रवक्ता संघ का तर्क है कि ऐसा कदम हिमाचल प्रदेश बोर्ड के विद्यालयों और सीबीएसई विद्यालयों के शिक्षकों के बीच पहले से मौजूद अंतर को और बढ़ा देगा, जबकि दोनों ही श्रेणियां एक ही शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हैं और समान सेवा नियमों द्वारा शासित हैं। शिक्षकों को आशंका है कि इस प्रकार का कृत्रिम विभाजन भेदभाव को जन्म देगा, समानता की भावना को कमजोर करेगा तथा सहयोगात्मक और सामूहिक शैक्षणिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाएगा, जिसका अंततः प्रतिभा के संरक्षण और पेशेवर विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा इसके नाम पर प्रवक्ताओं की दोबारा परीक्षा लेना पूरी तरह अनुचित है।

संघ ने कहा कि राज्य के स्कूल प्रवक्ता पहले ही कर्मचारी चयन आयोग (एचपीएसएससी) या लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) जैसी संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से चयनित होकर सेवा में आए हैं, इसलिए सीबीएसई स्कूलों के लिए अलग से परीक्षा आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है। यह बात संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी, राज्य महासचिव इंद्र सिंह ठाकुर, मुख्य संरक्षक लोकेंद्र नेगी, मुख्य मार्गदर्शक राजेश सैनी, चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, कार्यकारी अध्यक्ष दीप सिंह खन्ना एवं वाइस चेयरमैन राकेश भारद्वाज ने संयुक्त बयान में कही। संघ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव सचिव और शिक्षा निदेशक से आग्रह किया कि सीबीएसई व्यवस्था लागू करते समय सांविधानिक चयन प्रक्रिया, शिक्षकों के वर्षों के अनुभव और प्रशिक्षण जैसे व्यावहारिक उपायों को प्राथमिकता दी जाए और अलग  कडर ना बनाया जाए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़े और शिक्षक समुदाय में सकारात्मक वातावरण बना रहे। 

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