हिमाचल: आपदा में भी नहीं टूटेगा संपर्क, दूरसंचार विभाग ने की बड़ी तैयारी
पिछले वर्षों में आई आपदाओं से मिले अनुभवों को आधार बनाकर विभाग ने दूरसंचार नेटवर्क को अधिक मजबूत और आपदा-रोधी बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है।
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मानसून सीजन के दौरान भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी आपदाओं के बीच लोगों तक संचार सेवाएं निर्बाध पहुंचती रहें, इसके लिए दूरसंचार विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले वर्षों में आई आपदाओं से मिले अनुभवों को आधार बनाकर विभाग ने दूरसंचार नेटवर्क को अधिक मजबूत और आपदा-रोधी बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है। दूरसंचार विभाग के हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र के अपर महानिदेशक (दूरसंचार) वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए आपातकालीन परिस्थितियों में संचार सेवाओं का सुचारु संचालन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय, प्रशासनिक संचार और आम लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाने में दूरसंचार नेटवर्क की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। विभाग ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों तथा विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। दूरसंचार कंपनियों ने क्षतिग्रस्त ऑप्टिकल फाइबर केबल, पोल और अन्य ढांचागत संसाधनों को बदलने के साथ-साथ वैकल्पिक फाइबर मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं, जिससे किसी एक लाइन के क्षतिग्रस्त होने पर सेवाएं बाधित न हों।
आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रिल
तैयारियों की प्रभावशीलता जांचने के लिए हाल ही में विभागीय अधिकारियों और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधियों ने एसडीएमए के साथ बैठकों, टेबल टॉप अभ्यासों और मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया। इन अभ्यासों के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, प्रतिक्रिया क्षमता और संचार सेवाओं की बहाली की तैयारियों का परीक्षण किया गया।
इंट्रा-सर्किल रोमिंग बनेगी बड़ी ताकत
इस बार विभाग का विशेष फोकस इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने पर है। इसके तहत यदि किसी क्षेत्र में किसी एक कंपनी का नेटवर्क ठप हो जाता है तो उपभोक्ता दूसरे सेवा प्रदाता के नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगे। इससे आपदा की स्थिति में भी मोबाइल संचार पूरी तरह बंद नहीं होगा।