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चक्कीमोड़ में फिर मंडराया खतरा : खिसका मलबा, टूटे कंक्रीट के डंगे और फटीं सुरक्षा शीटें

Sat, 29 Aug 2026 11:47 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मपुर(सोलन)।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मपुर(सोलन)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 29 Aug 2026 11:47 AM IST
सार

पहाड़ी से अचानक मलबा खिसककर सड़क पर आ गिरा, जिससे सुरक्षा के लिए लगाए गए सीमेंट-कंक्रीट के डंगे धराशायी हो गए।  इस भूस्खलन से पहाड़ी को रोकने के लिए लगाई गईं मैकमेश और हाइड्रोजन ग्रीन शीट बुरी तरह फट गई हैं, जिससे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

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Danger Looms Again at Chakkimor: Debris Slides, Concrete Retaining Walls Break, and Safety Sheets Tear'
चक्कीमोड़ में खिसका मलबा। - फोटो : संवाद

विस्तार

कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर चक्कीमोड़ के पास एक बार फिर पहाड़ी बेहद खतरनाक बन गई है। पहाड़ी से अचानक मलबा खिसककर सड़क पर आ गिरा, जिससे सुरक्षा के लिए लगाए गए सीमेंट-कंक्रीट के डंगे धराशायी हो गए। इस भूस्खलन से पहाड़ी को रोकने के लिए लगाई गईं मैकमेश और हाइड्रोजन ग्रीन शीट बुरी तरह फट गई हैं, जिससे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि निर्माण कार्य में लगी एसआरएम कंपनी ने संभवतः कच्चे मलबे के ऊपर ही ये सुरक्षा शीटें बिछा दी थीं। जैसे ही ऊपर से मलबा खिसका, दोनों शीटें दबाव सहन नहीं कर सकीं और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

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इससे कंपनी द्वारा पहाड़ी को स्थिर करने के लिए अपनाई जा रही तकनीक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हादसे के बाद यातायात को सुरक्षित रखने के लिए मौके पर पुलिस कर्मचारियों को तैनात किया गया है। वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क पर लोहे के बैरिकेड्स लगाकर यातायात को वन-वे कर दिया गया है। पिछले वर्ष भी परवाणू से सोलन के बीच लाल चिकनी मिट्टी वाले पहाड़ों पर लगाई गई मैकमेश और ग्रीन शीट भारी बारिश के कारण फेल हो चुकी हैं। बारिश का पानी घुसने से दलदल बना और भारी पत्थरों ने शीटों को फाड़ दिया। धर्मपुर से जाबली के बीच ऐसी करीब चार पहाड़ियां हैं, जहां फटी हुई ग्रीन शीटों को निकालकर नई शीटें बिछाने का काम कंपनी के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है।

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पहाड़ पर अभी भी मलबा फंसा हुआ है और पहाड़ी काफी कच्ची है। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद पहाड़ी को स्थायी रूप से सुरक्षित करने का काम शुरू किया जाएगा।-मनोज कुमार, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, एसआरएम कंपनी

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