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हिमाचल: बोतलों और कैनियों में डीजल मिलना बंद, किसानों-बागवानों के खेतीबाड़ी कार्य प्रभावित; जानें क्या बोले

अमर उजाला ब्यूरो, संवाद/शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 15 Jun 2026 12:05 PM IST
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सार

बोतलों और कैनियों में डीजल बिक्री बंद होने से हिमाचल के किसानों और बागवानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पावर टिलर, स्प्रे मशीन, घास कटाई और ग्रेडिंग-पैकेजिंग जैसे कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर...

diesel sale ban in cans affects farmers orchard work himachal pradesh
शिमला के तारा हॉल स्थित पेट्रोल पंप में लगी वाहनों की कतारें - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद पेट्रोल पंप संचालकों ने कैनियों और बोतलों में डीजल देना बंद कर दिया है। इसके कारण जिले में किसानों-बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डीजल न मिलने के कारण खेतों में जुताई, स्प्रे, घास कटाई और अन्य कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। 

 

किसानों-बागवानों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर डीजल न मिलने के कारण खेतीबाड़ी के काम प्रभावित हो गए हैं। जिलाभर में खेतों और बगीचों में कई तरह के काम चल रहे हैं। ज्यादातर काम कृषि उपकरणों से होते हैं। स्प्रे करना, घास की कटाई, खरीफ सीजन में लगने वाली फसलों के लिए खेतों को तैयार करने में मशीनों का इस्तेमाल होता है। इसके लिए पावर टिलर, स्प्रे मशीन, घास काटने और ग्रेडिंग पैकेजिंग आदि कृषि उपकरणों की जरूरत पड़ती है और इनके लिए डीजल की आवश्यकता रहती है।
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डीजल न मिलने के कारण यह सभी कार्य ठप हो गए हैं। इसका बागवानों को दोहरा नुकसान हो रहा है। कृषि उपकरणों से जो कार्य कम समय में पूरा हो जाता था, उसके लिए अब समय अधिक लगेगा। इसके साथ ही कई बागवानों को अतिरिक्त मजदूर लगाने होंगे। इसके कारण लागत बढ़ जाएगी। बागवानों ने डीजल फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कहा कि डीजल की बोतल और कैनियों पर बिक्री से रोक हटनी चाहिए।
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खेतों-बगीचों में नहीं हो रहे काम
खेतों में अधिकतर काम कृषि उपकरणों से होते हैं। बगीचों में स्प्रे का काम मशीनों से करते हैं। स्टोन फ्रूट सीजन चला हुआ है। आने वाले दिनों में सेब सीजन शुरू होने वाला है। डीजल न मिलने से ग्रेडिंग-पैकेजिंग का काम नहीं हो पाएगा। सरकार के इस फैसले का सीधा असर बागवानों पर पड़ेगा। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। -रमन थारटा, युवा बागवान रोहड़ू

किसानों-बागवानों को मिले छूट
सरकार के इस फैसले का सीधा असर किसानों-बागवानों पर पड़ रहा है। आज के दौर में ज्यादातर कृषि कार्य उपकरणों से होते हैं। उपकरणों में पेट्रोल-डीजल का उपयोग होता है। इस मामले में केंद्र व राज्य सरका को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और किसानों-बागवानों को छूट देनी चाहिए। सरकार ने अगर कोई कदम नहीं उठाए तो इसका किसानों-बागवानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। -हरीश चौहान, बागवान नेता

खेतों-बगीचों में कामकाज ठप
डीजल न मिलने के कारण खेतों और बगीचों में काम ठप हो गए हैं। डीजल खरीदता था लेकिन अब अचानक मिलना बंद हो गया है। इसके कारण खेतों में जुताई, बगीचों में स्प्रे, घास कटाई और अन्य कृषि कार्य ठप हो गए हैं। सरकार इस रोक को हटाए ताकि किसानों-बागवानों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। -सोहन ठाकुर, अध्यक्ष सेब उत्पादक संघ
 

हिमाचल में 26 पेट्रोल पंपों ने एक दिन के लिए रोकी ईंधन बिक्री
हिमाचल में ईंधन बिक्री को लेकर लागू किए गए नए नियमों के बाद 26 पेट्रोल पंपों ने एक दिन तेल बेचने पर रोक लगा दी। वहीं तेल कंपनियों ने निर्धारित सीमा से अधिक डीजल बिक्री दर्ज होने पर हिमाचल के अलग-अलग जिलों के पेट्रोल पंपों की बिक्री प्रणाली को लॉक कर दिया। इससे पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हुई।

तेल कंपनियों ने बीते दिनों नए निर्देश जारी किए थे। एक वाहन में अधिकतम 200 लीटर डीजल और 70 लीटर पेट्रोल देने की सीमा तय की गई है। लेकिन इस दौरान कई पेट्रोल पंपों पर नए निर्देश लागू नहीं किए गए और पुरानी व्यवस्था के तहत ईंधन बिक्री की गई। इससे बड़े वाहनों को निर्धारित सीमा से अधिक डीजल भर दिया गया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग के समय तेल कंपनियों ने संबंधित आउटलेट्स की बिक्री प्रणाली पकड़ी गई। दूसरी ओर कंपनियों ने संबंधित डीलरों से स्पष्टीकरण मांगा है।

उधर, एचपी पेट्रोलियम डीलर यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि पुराने और नए निर्देशों के बीच बदलाव होने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। डीलरों ने तेल कंपनियों को स्पष्टीकरण भेज दिए हैं। हालांकि, अब सभी पंप सुचारू रूप से चल रहे हैं।
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