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Dr YS Parmar Jayanti: विधानसभा में डॉ. वाईएस परमार को श्रद्धांजलि, कुलदीप पठानिया ने गिनाए योगदान
Tue, 04 Aug 2026 10:56 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 04 Aug 2026 10:56 AM IST
सार
हिमाचल विधानसभा में डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर आयोजित समारोह में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार ने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश के विकास की मजबूत नींव रखी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित कई मंत्री, विधायक और गणमान्य लोग शामिल हुए।
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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर साथ बैठे हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लाइब्रेरी हॉल में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार ने सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश के विकास की मजबूत नींव रखी, जिसकी बदौलत आज हिमाचल देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना चुका है।
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विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के गठन के समय हिमाचल एक पहाड़ी राज्य था, जहां आय के साधन बेहद सीमित थे। इसके बावजूद डॉ. परमार ने दूरदर्शी सोच के साथ विकास की ऐसी आधारशिला रखी, जिसने प्रदेश को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार ने न केवल हिमाचल को अलग पहचान दिलाई, बल्कि प्रदेश के लोगों को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा वर्ष 1994 से डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की परंपरा निभा रही है। उनका कहना था कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. परमार के विचारों, संघर्ष और प्रदेश निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।
समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक और कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। डॉ. परमार के परिवार के सदस्य इस बार समारोह में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उनके पैतृक क्षेत्र बागथन में भी उनकी जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में साहित्यकार श्रीनिवास जोशी ने कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल को पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने प्रदेश के बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा के विस्तार पर खर्च किया, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने बताया कि डॉ. परमार सड़कों को विकास की रेखाएं मानते थे और सड़क निर्माण व विस्तार पर भी विशेष जोर दिया। इसके साथ ही पर्यटन, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत क्षेत्रों के विकास को भी उन्होंने प्राथमिकता दी। समारोह के दौरान वक्ताओं ने डॉ. वाईएस परमार के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी दोहराया।
जयराम ठाकुर बोले- डॉ. वाईएस परमार ने रखी हिमाचल के विकास की नींव
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान और विकास की मजबूत नींव डॉ. परमार ने रखी थी। उन्होंने कहा कि समय लगातार आगे बढ़ता है, लेकिन यह याद रखना भी जरूरी है कि प्रदेश की विकास यात्रा कहां से शुरू हुई और उसे आकार देने में किन नेताओं की क्या भूमिका रही।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आयोजित जयंती समारोह के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार ने अलग पहाड़ी राज्य के रूप में हिमाचल की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया। प्रदेश के गठन के समय संसाधन बेहद सीमित थे और भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने कठिन हालात में भी विकास की दिशा तय की। वे कई क्षेत्रों में पैदल पहुंचकर लोगों से संवाद करते थे और उनकी समस्याओं को समझते थे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब योजना निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने डॉ. परमार से प्रदेश की सबसे बड़ी आवश्यकता पूछी थी, तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि हिमाचल को "सड़क, सड़क और सड़क" चाहिए। उनका मानना था कि सड़क संपर्क ही पहाड़ी राज्य के विकास की असली रीढ़ है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के अधिकांश गांव सड़क नेटवर्क से जुड़ चुके हैं और यह डॉ. परमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि समय के साथ हिमाचल का सकल घरेलू उत्पाद बढ़ा है, साक्षरता दर में सुधार हुआ है और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा अभी भी जारी है और प्रदेश को आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
इस दौरान उन्होंने जयंती समारोह के स्वरूप को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले डॉ. परमार की जयंती का कार्यक्रम पीटरहॉफ, शिमला में भव्य स्तर पर आयोजित होता था, लेकिन अब इसका स्वरूप छोटा कर दिया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस आयोजन को पहले की तरह व्यापक बनाया जाए।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में दिखाई जाने वाली डॉक्यूमेंट्री में केवल डॉ. परमार और वर्तमान दौर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान को भी स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान और विकास की मजबूत नींव डॉ. परमार ने रखी थी। उन्होंने कहा कि समय लगातार आगे बढ़ता है, लेकिन यह याद रखना भी जरूरी है कि प्रदेश की विकास यात्रा कहां से शुरू हुई और उसे आकार देने में किन नेताओं की क्या भूमिका रही।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आयोजित जयंती समारोह के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि डॉ. परमार ने अलग पहाड़ी राज्य के रूप में हिमाचल की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया। प्रदेश के गठन के समय संसाधन बेहद सीमित थे और भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने कठिन हालात में भी विकास की दिशा तय की। वे कई क्षेत्रों में पैदल पहुंचकर लोगों से संवाद करते थे और उनकी समस्याओं को समझते थे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब योजना निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने डॉ. परमार से प्रदेश की सबसे बड़ी आवश्यकता पूछी थी, तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि हिमाचल को "सड़क, सड़क और सड़क" चाहिए। उनका मानना था कि सड़क संपर्क ही पहाड़ी राज्य के विकास की असली रीढ़ है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के अधिकांश गांव सड़क नेटवर्क से जुड़ चुके हैं और यह डॉ. परमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि समय के साथ हिमाचल का सकल घरेलू उत्पाद बढ़ा है, साक्षरता दर में सुधार हुआ है और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा अभी भी जारी है और प्रदेश को आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
इस दौरान उन्होंने जयंती समारोह के स्वरूप को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले डॉ. परमार की जयंती का कार्यक्रम पीटरहॉफ, शिमला में भव्य स्तर पर आयोजित होता था, लेकिन अब इसका स्वरूप छोटा कर दिया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस आयोजन को पहले की तरह व्यापक बनाया जाए।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में दिखाई जाने वाली डॉक्यूमेंट्री में केवल डॉ. परमार और वर्तमान दौर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान को भी स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।
डॉ. परमार के सपनों को धरातल पर उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि- सीएम सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी प्रदेश के विकास का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार के सपनों को केवल जयंती समारोह मनाकर पूरा नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी सोच और विकास मॉडल को धरातल पर उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आयोजित डॉ. वाईएस परमार जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने रियासत की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और हिमाचल को अलग पहाड़ी राज्य बनाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आधुनिक, आत्मनिर्भर और संतुलित विकास वाले हिमाचल का सपना देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार उसी सोच को आगे बढ़ा रही है। शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं और प्रदेश के 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए डॉ. वाईएस परमार छात्र ऋण योजना भी शुरू की गई है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी छात्र की शिक्षा में बाधा न बने।
उन्होंने कहा कि डॉ. परमार पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास के पक्षधर थे और सरकार भी इसी सिद्धांत पर काम कर रही है। "व्यवस्था परिवर्तन" केवल नारा नहीं, बल्कि विकास योजनाओं के माध्यम से इसे जमीन पर उतारा जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2038 तक प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी, इसलिए गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से सरकार गाय और भैंस के दूध पर समर्थन मूल्य दे रही है। उन्होंने कहा कि मंडी जिले में इस योजना से एक परिवार की मासिक आय करीब 36 हजार रुपये तक पहुंची है। इसके साथ ही हल्दी, गेहूं, मक्की और जौ जैसी फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल का लगभग 68 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि और करीब 5 प्रतिशत क्षेत्र बांधों के अधीन है। ऐसे में केवल लगभग 29 प्रतिशत भूभाग पर ही प्रदेश की करीब 70 लाख आबादी निवास करती है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं और पुरानी व्यवस्थाओं में बदलाव के लिए कानूनों में भी संशोधन किए जा रहे हैं।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से प्रदेश के आर्थिक हितों और संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के समक्ष एकजुट होकर हिमाचल का पक्ष रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदेश के विकास और भविष्य के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान को दर्शाने वाला एक विशेष वीडियो तैयार किया गया है, जिसमें हिमाचल के विकास की यात्रा को दर्शाया गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी प्रदेश के विकास का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार के सपनों को केवल जयंती समारोह मनाकर पूरा नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी सोच और विकास मॉडल को धरातल पर उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आयोजित डॉ. वाईएस परमार जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने रियासत की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और हिमाचल को अलग पहाड़ी राज्य बनाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आधुनिक, आत्मनिर्भर और संतुलित विकास वाले हिमाचल का सपना देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार उसी सोच को आगे बढ़ा रही है। शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं और प्रदेश के 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए डॉ. वाईएस परमार छात्र ऋण योजना भी शुरू की गई है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी छात्र की शिक्षा में बाधा न बने।
उन्होंने कहा कि डॉ. परमार पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास के पक्षधर थे और सरकार भी इसी सिद्धांत पर काम कर रही है। "व्यवस्था परिवर्तन" केवल नारा नहीं, बल्कि विकास योजनाओं के माध्यम से इसे जमीन पर उतारा जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2038 तक प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी, इसलिए गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से सरकार गाय और भैंस के दूध पर समर्थन मूल्य दे रही है। उन्होंने कहा कि मंडी जिले में इस योजना से एक परिवार की मासिक आय करीब 36 हजार रुपये तक पहुंची है। इसके साथ ही हल्दी, गेहूं, मक्की और जौ जैसी फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल का लगभग 68 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि और करीब 5 प्रतिशत क्षेत्र बांधों के अधीन है। ऐसे में केवल लगभग 29 प्रतिशत भूभाग पर ही प्रदेश की करीब 70 लाख आबादी निवास करती है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं और पुरानी व्यवस्थाओं में बदलाव के लिए कानूनों में भी संशोधन किए जा रहे हैं।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से प्रदेश के आर्थिक हितों और संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के समक्ष एकजुट होकर हिमाचल का पक्ष रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदेश के विकास और भविष्य के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान को दर्शाने वाला एक विशेष वीडियो तैयार किया गया है, जिसमें हिमाचल के विकास की यात्रा को दर्शाया गया है।
हिमाचल विधानसभा में डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर आयोजित समारोह में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार ने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश के विकास की मजबूत नींव रखी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित कई मंत्री, विधायक और गणमान्य लोग शामिल हुए।