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NGT Notice: हिमाचल की दवा कंपनी पर पर्यावरण उल्लंघन के आरोप, एनजीटी ने जारी किया नोटिस
Tue, 04 Aug 2026 11:54 AM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:54 AM IST
सार
एनजीटी ने सोलन के नालागढ़ स्थित किइनवान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों पर नोटिस जारी किया है। कंपनी पर अपशिष्ट जल और रासायनिक कचरा खड्ड में छोड़ने, भूजल के अधिक दोहन और पर्यावरणीय स्वीकृति के दौरान गलत जानकारी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।
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एनजीटी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ तहसील स्थित पलासरा गांव में संचालित एक औषधि निर्माण इकाई किइनवान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले में नोटिस जारी किया है। यह मामला पर्यावरणीय मानकों के पालन, जल स्रोतों की सुरक्षा और औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त करने के दौरान अपने फॉर्म-II में गलत जानकारी दी। आवेदन के अनुसार कंपनी ने दावा किया था कि इकाई से कोई अपशिष्ट जल उत्पन्न नहीं होगा और उसके आसपास कोई जल स्रोत नहीं है, जबकि चिकनी खड्ड, जो सरसा नदी की सहायक धारा है, इकाई के समीप स्थित है।
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आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (Zero Liquid Discharge) इकाई होने के बावजूद कंपनी द्वारा कथित रूप से अपशिष्ट जल और रासायनिक कचरे का अवैध रूप से चिकनी खड्ड में निर्वहन किया जा रहा है। इसके अलावा विषैले अपशिष्ट जल के निस्तारण, स्वीकृत एक बोरवेल के स्थान पर छह बोरवेल से भूजल दोहन, मछलियों की मौत और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
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आवेदकों ने अधिकरण को बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले कंपनी को क्लीन चिट दी थी, लेकिन बाद में कथित उल्लंघनों के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया। उनका कहना है कि इस नोटिस पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अपने दावों के समर्थन में आवेदकों ने दस्तावेज, समाचार रिपोर्ट और फोटोग्राफ भी अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि यह प्रकरण पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। इसके बाद अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए आवेदकों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले नोटिस की तामील का शपथपत्र दाखिल करें।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने मूल आवेदन संख्या 446/2026 (धर्मिंदर सिंह एवं अन्य बनाम किइनवान प्रा. लि. एवं अन्य) में पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
सिरमौर में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों की होगी जांच, डीसी को कार्रवाई के निर्देश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने जिला प्रशासन को शिकायत की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
मामला नदियों और अन्य जल स्रोतों के निकट खनन निरीक्षण चौकी, वज़न पुल (वेब्रिज) के कथित अवैध निर्माण और मलबा डंप किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि इन गतिविधियों से पर्यावरण और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थल पर जांच आवश्यक है। इसके बाद अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त, सिरमौर को निर्देश दिए कि वे आवेदक की शिकायत पर विचार करें और संबंधित स्थान का निरीक्षण कर तथ्यों की जांच कराएं।
अधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा दो माह के भीतर उचित सुधारात्मक (Remedial) और दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन भी कराया जाए।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को एनजीटी की प्रधान पीठ द्वारा पारित किया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने की। यह आदेश मूल आवेदन संख्या 231/2026, नाथूराम चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य में पारित हुआ।
एनजीटी के इस निर्देश को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने जिला प्रशासन को शिकायत की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
मामला नदियों और अन्य जल स्रोतों के निकट खनन निरीक्षण चौकी, वज़न पुल (वेब्रिज) के कथित अवैध निर्माण और मलबा डंप किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि इन गतिविधियों से पर्यावरण और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थल पर जांच आवश्यक है। इसके बाद अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त, सिरमौर को निर्देश दिए कि वे आवेदक की शिकायत पर विचार करें और संबंधित स्थान का निरीक्षण कर तथ्यों की जांच कराएं।
अधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा दो माह के भीतर उचित सुधारात्मक (Remedial) और दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन भी कराया जाए।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को एनजीटी की प्रधान पीठ द्वारा पारित किया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने की। यह आदेश मूल आवेदन संख्या 231/2026, नाथूराम चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य में पारित हुआ।
एनजीटी के इस निर्देश को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।