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हिमाचल: आसान लोन के लालच में फर्जी एप के चंगुल में फंस रहे युवा, फिर शातिर फोन की फोटो गैलरी में लगा रहे सेंध
Mon, 19 Oct 2026 10:46 AM IST
Ankesh Dogra
देवेंद्र ठाकुर, शिमला।
देवेंद्र ठाकुर, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:46 AM IST
सार
पांच मिनट में बिना दस्तावेज ऋण देने का लालच देकर फर्जी लोन एप युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। शिमला साइबर क्राइम सेल को एक महीने में आठ शिकायतें मिली हैं। पीड़ितों को निजी तस्वीरों और कॉन्टैक्ट लिस्ट के दुरुपयोग से बदनाम करने की धमकियां दी जा रही हैं।
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5 मिनट में लोन, फिर ब्लैकमेलिंग!
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
डिजिटल माध्यम से ऋण लेना भले ही आसान हुआ है, लेकिन तुरंत लोन देने का लालच लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। पांच मिनट में बिना दस्तावेज ऋण देने का दावा करने वाले फर्जी लोन एप के जाल में प्रदेश के युवा फंस रहे हैं। इन एप के जरिए पांच से दस हजार रुपये तक का ऋण देने के बाद कथित तौर पर युवाओं को ब्लैकमेल और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। शिमला साइबर क्राइम सेल को पिछले एक महीने में इस तरह की आठ शिकायतें मिली हैं। इनमें शिमला सहित प्रदेश के कई जिलों के युवा शामिल हैं।
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चिंता की बात यह है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी ऐसे एप के निशाने पर हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर तुरंत ऋण देने वाले एप के विज्ञापन दिखाई दिए। बिना ज्यादा औपचारिकताओं के ऋण मिलने की उम्मीद में उन्होंने आवेदन कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जाने लगा। कुछ मामलों में ऋण की रकम चुकाने के बाद भी प्रताड़ना जारी रहने की शिकायत मिली है।
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निजी तस्वीरों से बदनाम करने की धमकी
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी लोन एप से जुड़ी सबसे गंभीर समस्या वसूली के लिए अपनाए जाने वाले कथित दबावपूर्ण तरीके हैं। भुगतान में देरी होने पर पीड़ितों को धमकी दी जाती है कि उनके फोन की संपर्क सूची में शामिल लोगों को फोन या संदेश भेजे जाएंगे। कुछ मामलों में तस्वीरों को बदलकर या उनमें छेड़छाड़ करके पीड़ितों को बदनाम करने की धमकी देने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी लोन एप से जुड़ी सबसे गंभीर समस्या वसूली के लिए अपनाए जाने वाले कथित दबावपूर्ण तरीके हैं। भुगतान में देरी होने पर पीड़ितों को धमकी दी जाती है कि उनके फोन की संपर्क सूची में शामिल लोगों को फोन या संदेश भेजे जाएंगे। कुछ मामलों में तस्वीरों को बदलकर या उनमें छेड़छाड़ करके पीड़ितों को बदनाम करने की धमकी देने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
शिकायतों में कथित तौर पर ऋण में मिली रकम से कई गुना अधिक भुगतान मांगने की बात भी सामने आई है। एप को जरूरी से ज्यादा अनुमति देने पर उपयोगकर्ता की संपर्क सूची, फोटो गैलरी और दूसरी निजी जानकारियों तक पहुंच बनाई जा सकती है। बाद में इन जानकारियों का इस्तेमाल डराने-धमकाने या ब्लैकमेल करने के लिए किए जाने का खतरा रहता है।
पुलिस ने 1930 पर शिकायत करने की अपील की
एसपी शिमला साइबर क्राइम अमित यादव ने युवाओं से फर्जी लोन एप से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में इस तरह की कई शिकायतें मिली हैं और पुलिस सभी मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने आग्रह किया कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे। ठगी से जुड़े लेनदेन के स्क्रीनशॉट, बैंक विवरण, फोन नंबर, संदेश, एप की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। इन्हें डिलीट न करें, क्योंकि जांच में ये महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
एसपी शिमला साइबर क्राइम अमित यादव ने युवाओं से फर्जी लोन एप से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में इस तरह की कई शिकायतें मिली हैं और पुलिस सभी मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने आग्रह किया कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे। ठगी से जुड़े लेनदेन के स्क्रीनशॉट, बैंक विवरण, फोन नंबर, संदेश, एप की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। इन्हें डिलीट न करें, क्योंकि जांच में ये महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
लोगों तक ऐसे पहुंचते हैं फर्जी एप
फर्जी लोन एप सोशल मीडिया विज्ञापनों, सर्च परिणामों, एसएमएस में भेजे गए लिंक और व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए लोगों तक पहुंच सकते हैं। इनमें ‘बिना दस्तावेज ऋण’, ‘तुरंत मंजूरी’ और ‘पांच मिनट में लोन’ जैसे आकर्षक दावे किए जाते हैं। कई बार किसी लोकप्रिय मंच पर दिखाई देने के कारण लोग इन्हें वैध समझ लेते हैं। एप इंस्टॉल करने के बाद उपयोगकर्ता से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक विवरण और फोटो जैसी संवेदनशील जानकारियां मांगी जा सकती हैं। कुछ एप संपर्क सूची, फोटो गैलरी, कैमरा और एसएमएस तक पहुंच की अनुमति भी मांगते हैं। जरूरत से ज्यादा अनुमति देने पर निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
फर्जी लोन एप सोशल मीडिया विज्ञापनों, सर्च परिणामों, एसएमएस में भेजे गए लिंक और व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए लोगों तक पहुंच सकते हैं। इनमें ‘बिना दस्तावेज ऋण’, ‘तुरंत मंजूरी’ और ‘पांच मिनट में लोन’ जैसे आकर्षक दावे किए जाते हैं। कई बार किसी लोकप्रिय मंच पर दिखाई देने के कारण लोग इन्हें वैध समझ लेते हैं। एप इंस्टॉल करने के बाद उपयोगकर्ता से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक विवरण और फोटो जैसी संवेदनशील जानकारियां मांगी जा सकती हैं। कुछ एप संपर्क सूची, फोटो गैलरी, कैमरा और एसएमएस तक पहुंच की अनुमति भी मांगते हैं। जरूरत से ज्यादा अनुमति देने पर निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
फर्जी लोन एप से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान
- जांचें कि ऋण देने वाली कंपनी किसी भारतीय रिजर्व बैंक से विनियमित बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी से जुड़ी है या नहीं।
- कंपनी और एप की विश्वसनीयता की जांच करें। केवल रेटिंग या समीक्षाओं के आधार पर भरोसा न करें।
- अनजान लिंक से एप डाउनलोड करने से बचें।
- संपर्क सूची, फोटो गैलरी, कैमरा या लोकेशन जैसी अनावश्यक अनुमतियां न दें।
- ऋण लेने से पहले कंपनी का वैध पता, ईमेल और ग्राहक सहायता नंबर जांचें।
- ऋण की शर्तें, ब्याज, शुल्क और भुगतान की समय-सीमा ध्यान से पढ़ें।
वित्तीय संस्थानों की वास्तविक कॉल पहचानने के लिए 1600 नंबर शृंखला
फर्जी वित्तीय कॉल और साइबर ठगी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वित्तीय सेवा-संबंधी कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए 1600 नंबर शृंखला शुरू की गई है। इसका उद्देश्य बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों की वास्तविक सेवा-संबंधी कॉल पहचानने में उपभोक्ताओं की मदद करना है। वहीं ऋण सहित वित्तीय उत्पादों से जुड़ी प्रचार और विपणन कॉल के लिए 140 नंबर शृंखला का उपयोग किया जाता है।
फर्जी वित्तीय कॉल और साइबर ठगी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वित्तीय सेवा-संबंधी कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए 1600 नंबर शृंखला शुरू की गई है। इसका उद्देश्य बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों की वास्तविक सेवा-संबंधी कॉल पहचानने में उपभोक्ताओं की मदद करना है। वहीं ऋण सहित वित्तीय उत्पादों से जुड़ी प्रचार और विपणन कॉल के लिए 140 नंबर शृंखला का उपयोग किया जाता है।
किसी कॉल पर केवल नंबर देखकर पूरी तरह भरोसा न करें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड या एक बार इस्तेमाल होने वाला सत्यापन कोड साझा करने से पहले संबंधित वित्तीय संस्थान के आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।