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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   High Court: Contract teachers to receive regular appointment upon completion of two year tenure; High Court cl

Himachal: अनुबंध शिक्षकों को दो साल का कार्यकाल पूरा होते ही मिलेगी नियमित नियुक्ति, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

Mon, 10 Aug 2026 07:59 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 10 Aug 2026 07:59 PM IST
सार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि जब कर्मचारियों का चयन वैधानिक नियमों के तहत स्वीकृत पदों पर हुआ है और उनका कार्य-प्रदर्शन संतोषजनक रहा है, तो उन्हें समय पर नियमित न करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। 

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High Court: Contract teachers to receive regular appointment upon completion of two year tenure; High Court cl
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अनुबंध शिक्षकों (लेक्चर स्कूल न्यू) के मामले में स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक देरी या चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर शिक्षकों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि कोई शिक्षक दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवाकाल पूरा कर लेता है, तो वह उसी तिथि से नियमितीकरण का हकदार बन जाता है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि जब कर्मचारियों का चयन वैधानिक नियमों के तहत स्वीकृत पदों पर हुआ है और उनका कार्य-प्रदर्शन संतोषजनक रहा है, तो उन्हें समय पर नियमित न करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

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इससे शिक्षकों को उनके नियमित वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता से वंचित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने राज्य प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं को 31 मार्च 2024 को दो वर्ष की सेवा पूरी करने के उपरांत एक अप्रैल 2024 से नियमित करें और एरियर सहित सभी वित्तीय लाभों का भुगतान छह सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा नियमितीकरण नीति के क्लाउज नौ को याचिकाकर्ताओं के मामले में अमान्य और अप्रभावी करार दिया।

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पीठ ने कहा कि यह शर्त सरकार को मनमाने ढंग से नियमित करने की असीमित शक्ति देती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता मोहिंद्र और अन्य को वर्ष 2019 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नवंबर-दिसंबर 2021 में लेक्चरर (स्कूल-न्यू) के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था। प्रदेश सरकार की दो दिसंबर 2023 की नीति के अनुसार 31 मार्च 2024 तक दो वर्ष का निरंतर अनुबंध सेवा काल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। याचिकाकर्ताओं ने नवंबर-दिसंबर 2023 में ही अपने दो साल पूरे कर लिए थे और वे एक अप्रैल 2024 से नियमितीकरण के हकदार थे।

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हालांकि, राज्य सरकार ने उन्हें छह जुलाई 2024 से (विलंब के साथ) नियमित किया। राज्य सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि लोक सभा और उपचुनाव के कारण 16 मार्च 2024 से 14 जून 2024 तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी, इस कारण नियमितीकरण आदेश जारी करने में देरी हुई। नीति की शर्त संख्या नौ में नियमितीकरण आदेश जारी होने की तिथि से ही प्रभावी माना जाता है, इसलिए इसे पिछली तिथि से लागू नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी की पात्रता में कोई संदेह नहीं है, तो चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि वह पुनर्स्थापना के सिद्धांत को लागू करे। सरकार की देरी का नुकसान कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता।

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