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Himachal: प्रदेश में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा, जताई नाराजगी

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 02 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

 शिमला सहित पूरे प्रदेश में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की बदहाली व गंदगी को लेकर संबंधित अधिकारियों और नगर निगम शिमला को एक बेहतर हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है।

High Court Seeks Affidavit and Expresses Displeasure Over Dilapidated Condition of Public Toilets in the State
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला सहित पूरे प्रदेश में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की बदहाली व गंदगी को लेकर संबंधित अधिकारियों और नगर निगम शिमला को एक बेहतर हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। इसमें स्पष्ट रूप से यह दिखाना होगा कि अदालत के पुराने निर्देशों के बाद जमीन पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, शौचालयों की मौजूदा स्थिति क्या है और आगे क्या बदलाव किए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन्न चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एक साल बीत जाने के बाद भी शिमला नगर निगम की ओर से ठोस कार्रवाई रिपोर्ट पेश न करने पर नाराजगी जताई है। मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई को होगी।

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खंडपीठ के ध्यान में लाया कि शिमला नगर निगम के कमिश्नर की ओर से 20 मई 2025 को एक हलफनामा दायर किया गया था। इसमें बताया गया है कि मुख्य स्वच्छता निरीक्षक और वार्ड पार्षदों की ओर से शिमला के सभी 34 वार्डों का दौरा किया जाएगा। इसमें अस्वच्छ शौचालयों, कचरे के हॉटस्पॉट्स और अवैध बैनर-पोस्टरों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके। अदालत ने कड़े शब्दों में नोट किया कि इस निरीक्षण रिपोर्ट में कई शौचालयों के स्थिति दयनीय होने की बात सामने आई थी। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस रिपोर्ट को आए एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन की तरफ से यह बताने के लिए कोई नया हलफनामा दायर नहीं किया गया कि इस दिशा में क्या सटीक और प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

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सुनवाई के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज निदेशक की ओर से जनवरी 2025 में दायर किए गए पुराने हलफनामे का भी हवाला दिया गया। इसके अनुसार राज्य के कुल 5,548 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों में से अब तक केवल 2,606 चालू परिसरों का ही निरीक्षण किया जा सका है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों द्वारा शौचालयों के रखरखाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की जा रही है। इसके साथ ही हिमाचल शाखा सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन के नियंत्रक ने 7 अप्रैल 2026 को ताजा हलफनामा दायर किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनके नियंत्रण वाले पे एंड यूज (भुगतान करो और इस्तेमाल करो) शौचालयों में खराब नलकों को बदल दिया गया है, फर्श की मरम्मत की गई है और महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।

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यूएस क्लब का गेट तोड़ने पर लोक निर्माण विभाग और नगर निगम से जवाब तलब

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट को सड़क चौड़ा करने के नाम पर पूरी तरह से ढहाए जाने के मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने समाचार पत्रों में छपी खबरों पर खुद संज्ञान लेते हुए इसे एक जनहित याचिका रूप में दर्ज किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के सचिव और नगर निगम शिमला के कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस कार्रवाई के पीछे की वजहों को स्पष्ट करने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। अदालत में अधिवक्ता खन्ना ने ‘द ट्रिब्यून’ और ‘अमर उजाला’ की खबरों का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया था कि सड़क को चौड़ा करने के लिए इस प्रतिष्ठित गेट को पूरी तरह हटा दिया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में लाया गया कि ऐतिहासिक रिज मैदान से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह गेट लकड़ी, पत्थरों और स्लेट की छत से बना एक प्राचीन व हेरिटेज (धरोहर) ढांचा था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की ऐतिहासिक धरोहर को बिना किसी बहाली के प्रयास के इस तरह अचानक नहीं गिराया जा सकता था। खंडपीठ ने कहा कि यदि सड़क चौड़ा करने के लिए इसे हटाना अनिवार्य भी था, तो इसके हिस्सों और सामग्री को सुरक्षित तरीके से निकालकर उसी पुरानी बनावट और डिजाइन के आधार पर वहां दोबारा एक नया गेट स्थापित किया जाना चाहिए था। यह कथत कार्रवाई लोक निर्माण विभाग द्वारा की गई है।
 

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