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हिमाचल प्रदेश: दवा खा रहे हैं या बीमारी बढ़ा रहे हैं? एंटीबायोटिक पर चौंकाने वाला खुलासा; इलाज हुआ मुश्किल
Thu, 17 Sep 2026 10:30 AM IST
Ankesh Dogra
आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 17 Sep 2026 10:30 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रजिस्टेंस का खतरा बढ़ रहा है। आईजीएमसी शिमला में वर्ष 2025 के दौरान 14,312 मरीजों के सैंपलों पर किए गए अध्ययन में 45% मामलों में एंटीबायोटिक दवाएं असरदार नहीं मिलीं। यूरिन संक्रमण से जुड़े मामलों में भी 51% सैंपलों में दवाओं के बेअसर होने की बात सामने आई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सक सलाह के एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन खतरनाक साबित हो रहा है। एंटीबायोटिक रजिस्टेंस से मरीजों को हाई डोज दवाएं तक असर नहीं कर रही हैं। इससे सुपरबग का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के अस्पतालों में ऐसे मामले आ रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि 45 फीसदी मामले ऐसे मिले हैं जिन पर इस प्रकार की दिक्कत देखी गई है, यानी दवाएं असर नहीं कर रही हैं। इसके अलावा यूरिन जांच में पाया गया कि 51 फीसदी मामलों में मूत्र मार्ग में फैलाने वाले बैक्टीरिया के उपचार के लिए मिलने वाली दवाएं भी असर ही नहीं कर रही हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण बिना चिकित्सक की सलाह के मनमर्जी से अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। वहीं, अगर कोई बीमार होने पर एंटीबायोटिक का सेवन करता है और उसे थोड़ी राहत मिल जाती तो वह कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। इससे जीवाणुओं को सुपरबग बनाने में मदद मिल रही है। इससे अब बीमारी का उपचार करने के लिए चिकित्सकों को भी दिक्कतें आ रही हैं। वर्ष 2025 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में सूक्ष्मजीव विज्ञान और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने अध्ययन किया। इसमें 14,312 मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। जांच के दौरान तथ्य खुलासा हुआ है।
ये उठाए जा सकते हैं कदम
बिना कल्चर टेस्ट दवा पर पाबंदी प्रिस्क्रिप्शन का नियमित ऑडिट, आईसीयू में सख्त सेनिटाइजेशन
ऐसे बचें
सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर एंटीबायोटिक न लें, पहले सलाह लें। चिकित्सक की ओर से लिखी गई दवा को आधे में न छोड़ें।
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इसका सबसे बड़ा कारण बिना चिकित्सक की सलाह के मनमर्जी से अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। वहीं, अगर कोई बीमार होने पर एंटीबायोटिक का सेवन करता है और उसे थोड़ी राहत मिल जाती तो वह कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। इससे जीवाणुओं को सुपरबग बनाने में मदद मिल रही है। इससे अब बीमारी का उपचार करने के लिए चिकित्सकों को भी दिक्कतें आ रही हैं। वर्ष 2025 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में सूक्ष्मजीव विज्ञान और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने अध्ययन किया। इसमें 14,312 मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। जांच के दौरान तथ्य खुलासा हुआ है।
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ये उठाए जा सकते हैं कदम
बिना कल्चर टेस्ट दवा पर पाबंदी प्रिस्क्रिप्शन का नियमित ऑडिट, आईसीयू में सख्त सेनिटाइजेशन
ऐसे बचें
सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर एंटीबायोटिक न लें, पहले सलाह लें। चिकित्सक की ओर से लिखी गई दवा को आधे में न छोड़ें।
खून और बलगम के सैंपल की जांच में खुलासा
शोध के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीजों के रक्त, यूरिन और बलगम के सैकड़ों कल्चर नमूनों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। सैंपल का अध्ययन करने पर खुलासा हुआ। इसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। वहीं, आईसीयू में 48 घंटे से अधिक समय तक वेटिलेर पर रहने वाले मरीजों में अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा काफी अधिक देखा गया।
एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल गलत है। यह किसी भी महामारी से कम नहीं है। इस बारे में लोगों को भी जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। -डॉ. अमित सचदेवा, प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन
शोध के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीजों के रक्त, यूरिन और बलगम के सैकड़ों कल्चर नमूनों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। सैंपल का अध्ययन करने पर खुलासा हुआ। इसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। वहीं, आईसीयू में 48 घंटे से अधिक समय तक वेटिलेर पर रहने वाले मरीजों में अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा काफी अधिक देखा गया।
एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल गलत है। यह किसी भी महामारी से कम नहीं है। इस बारे में लोगों को भी जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। -डॉ. अमित सचदेवा, प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन