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Himachal: ट्रांसफर मामलों में सीधे कोर्ट जाने वाले कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई, सरकार ने बढ़ाई सख्ती

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 19 May 2026 11:32 AM IST
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सार

 कार्मिक विभाग ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन कर सीधे न्यायालय जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

Himachal govt: Action to be taken against employees who approach the court directly regarding transfer matters
हिमाचल सरकार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़े मामलों में बिना विभागीय प्रक्रिया अपनाए सीधे अदालतों का रुख करने पर सख्ती बढ़ा दी है। कार्मिक विभाग ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन कर सीधे न्यायालय जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि तबादलों को विनियमित करने के लिए वर्ष 2013 में सीजीपी 2013 लागू किए गए थे। 

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तबादलों से संबंधित शिकायतों के निवारण की व्यवस्था तय

इसके तहत फरवरी 2025 में पैरा 22ए जोड़ा गया था, जिसमें तबादलों से संबंधित शिकायतों के निवारण की व्यवस्था तय की गई थी। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे पहले अपनी शिकायत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखें। हालांकि सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और सीधे अदालतों में याचिकाएं दायर कर रहे हैं। इससे कई मामलों में अदालतों से स्थगन आदेश भी मिल रहे हैं। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए अब पैरा 22ए में नया उपबंध जोड़ दिया है।

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निर्देशों के उल्लंघन पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई कर्मचारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया तो इसे सरकारी आदेशों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 तथा अन्य लागू नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। सरकार ने सभी विभागों, प्रशासनिक सचिवों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस निर्णय की जानकारी सभी कर्मचारियों तक पहुंचाई जाए, ताकि भविष्य में तबादला मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके।

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कर्मचारियों से जुड़े मामलों में मूल आदेश माना जाएगा अंतिम आधार

वहीं प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि हैंड बुक ऑन पर्सोनल मैटर्स केवल संदर्भ दस्तावेज है। किसी भी सेवा मामले में अंतिम एवं वैधानिक आधार मूल सरकारी अधिसूचनाएं, आदेश और निर्देश ही होंगे। मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देशों में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, बोर्ड-निगमों और विश्वविद्यालयों को भविष्य में सेवा मामलों का निपटारा करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। सरकार ने यह कदम 2021 संस्करण की हैंडबुक के कुछ विवरणात्मक अंशों में त्रुटियां, विसंगतियां और लिपिकीय गलतियां सामने आने के बाद उठाया है। 

कई मामलों में उच्च न्यायालय ने भी इन विवरणात्मक हिस्सों का संदर्भ लिया, जिससे मूल आदेशों से अलग व्याख्याएं सामने आईं और प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी। कार्मिक और वित्त विभाग राज्य सरकार में सेवा शर्तों, कार्मिक नीतियों और नियमों की व्याख्या से जुड़े मामलों के नोडल विभाग हैं। विभागों की ओर से समय-समय पर जारी आदेश, अधिसूचनाएं और दिशा-निर्देश पहले से ही सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। सरकार ने बताया कि 1986 और 1995 में प्रकाशित हैंडबुक के बाद सभी प्रचलित नियमों और आदेशों को एकीकृत कर हैंड बुक ऑन पर्सोनल मैटर्स तैयार किया गया था, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों को एक ही जगह संदर्भ सामग्री मिल सके। 

 हैंडबुक जारी करते समय उसमें पहले ही डिस्क्लेमर जोड़ा गया था कि यदि हैंडबुक और मूल सरकारी आदेशों में कोई विरोधाभास हो तो मूल आदेश ही प्रभावी होंगे। यह भी कहा गया था कि हैंडबुक किसी कानूनी साक्ष्य या अंतिम व्याख्या का विकल्प नहीं है। इसके बावजूद विभिन्न अध्यायों के विवरणात्मक हिस्सों में कुछ ऐसी त्रुटियां सामने आईं, जिनके आधार पर अलग-अलग स्तर पर फैसले लिए जाने लगे। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने अब नई कार्यप्रणाली तय की है।

सरकार ने तय किए चार बड़े सिद्धांत

किसी भी असंगति या भ्रम की स्थिति में केवल मूल अधिसूचनाओं और सरकारी आदेशों पर ही भरोसा किया जाएगा। हैंडबुक के विवरणात्मक हिस्सों के आधार पर बिना मूल दस्तावेज देखे कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सभी विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी व्याख्या और प्रशासनिक फैसले मौजूदा नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अनुरूप हों। यदि किसी नियम की व्याख्या को लेकर संदेह हो तो संबंधित प्रशासनिक विभाग को निर्णय लेने से पहले कार्मिक या वित्त विभाग से औपचारिक राय लेना अनिवार्य होगा

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