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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस: 1951 में 7.98%, अब 99.5% साक्षरता, हिमाचल ने ऐसे बदली अपनी तस्वीर, जानिए पूरा सफर

Tue, 08 Sep 2026 09:44 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 08 Sep 2026 09:44 AM IST
सार

International Literacy Day: हिमाचल प्रदेश ने साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 1951 में महज 7.98 फीसदी साक्षरता दर वाला हिमाचल अब 99.5 फीसदी तक पहुंच गया है। प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि 99.7 फीसदी के साथ गोवा पहले स्थान पर है। वर्ष 2023-24 में चिन्हित 94,930 निरक्षरों में से दो वर्षों के दौरान 66 हजार से अधिक लोगों को साक्षर बनाया गया। अब प्रदेश में 28,480 निरक्षर शेष हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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himachal literacy rate 99.5 percent second in india 28480 illiterate
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश अब देश के लिए साक्षरता का आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर महज 7.98 फीसदी थी, वहीं आज हिमाचल लगभग पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। 75.28 लाख की आबादी वाले प्रदेश में अब केवल 28,480 लोग ही निरक्षर शेष बचे हैं। 99.7 फीसदी साक्षरता दर के साथ गोवा का देश में पहला स्थान है,जबकि 99.5 फीसदी के साथ हिमाचल दूसरे नंबर पर है।

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केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत चलाए गए विशेष अभियान ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से हजारों लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाया गया है। प्रदेश में वर्ष 2023-24 के दौरान किए गए सर्वेक्षण में 94,930 निरक्षर व्यक्तियों की पहचान की गई थी। इसके बाद सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच तीन चरणों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट आयोजित किए गए। इन परीक्षाओं के माध्यम से यह आकलन किया गया कि शिक्षार्थियों ने पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणना करना सीखा है या नहीं। 
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लगातार प्रशिक्षण और मूल्यांकन के परिणामस्वरूप दो वर्षों के भीतर 66 हजार से अधिक लोग साक्षरता की श्रेणी में शामिल हुए। अब प्रदेश में निरक्षरों की संख्या घटकर केवल 28,480 रह गई है। हिमाचल का साक्षरता अभियान केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रहा। बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए शिक्षार्थियों को डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। 
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उल्लास कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्कूलों का व्यापक नेटवर्क, बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान, सामाजिक जागरूकता और समुदाय आधारित भागीदारी ने साक्षरता को जन आंदोलन का रूप दिया। साक्षरता अभियान में महिलाओं की भागीदारी अधिक रही। स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर चलाए गए कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों महिलाओं ने अक्षर ज्ञान प्राप्त किया।

आज राष्ट्रीय कार्यक्रम में योजना साझा करेगा प्रदेश
मंगलवार को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में हिमाचल अपनी योजना को साझा करेगा। प्रदेश में किस प्रकार साक्षरता दर बढ़ाने को काम किया गया। इसका उल्लेख किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर इस कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। उल्लास के नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौहान और शिक्षा निदेशक आशीष कोहली योजना की प्रस्तुति देंगे। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि अब शिक्षा विभाग का लक्ष्य शेष बचे 28,480 निरक्षर लोगों तक पहुंचना है। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। 
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