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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   International Literacy Day: Himachal on the threshold of 100% literacy; only 28,480 people remain illiterate.

विश्व साक्षरता दिवस: 100 फीसदी साक्षरता दर की दहलीज पर हिमाचल, सिर्फ 28,480 लोग ही रह गए निरक्षर

Tue, 08 Sep 2026 05:45 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 08 Sep 2026 05:45 AM IST
सार

वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर महज 7.98 फीसदी थी, वहीं आज हिमाचल लगभग पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है। 75.28 लाख की आबादी वाले प्रदेश में अब केवल 28,480 लोग ही निरक्षर शेष बचे हैं।

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International Literacy Day: Himachal on the threshold of 100% literacy; only 28,480 people remain illiterate.
हिमाचल साक्षरता दर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश अब देश के लिए साक्षरता का आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर महज 7.98 फीसदी थी, वहीं आज हिमाचल लगभग पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है। 75.28 लाख की आबादी वाले प्रदेश में अब केवल 28,480 लोग ही निरक्षर शेष बचे हैं। 99.7 फीसदी साक्षरता दर के साथ गोवा का देश में पहला स्थान है,जबकि 99.5 फीसदी के साथ हिमाचल दूसरे नंबर पर है।

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केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत चलाए गए विशेष अभियान ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से हजारों लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाया गया है। प्रदेश में वर्ष 2023-24 के दौरान किए गए सर्वेक्षण में 94,930 निरक्षर व्यक्तियों की पहचान की गई थी। इसके बाद सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच तीन चरणों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट आयोजित किए गए। इन परीक्षाओं के माध्यम से यह आकलन किया गया कि शिक्षार्थियों ने पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणना करना सीखा है या नहीं। लगातार प्रशिक्षण और मूल्यांकन के परिणामस्वरूप दो वर्षों के भीतर 66 हजार से अधिक लोग साक्षरता की श्रेणी में शामिल हुए। अब प्रदेश में निरक्षरों की संख्या घटकर केवल 28,480 रह गई है।

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हिमाचल का साक्षरता अभियान केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रहा। बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए शिक्षार्थियों को डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने पहली बार स्मार्टफोन का उपयोग करना सीखा। उल्लास कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्कूलों का व्यापक नेटवर्क, बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान, सामाजिक जागरूकता और समुदाय आधारित भागीदारी ने साक्षरता को जन आंदोलन का रूप दिया। साक्षरता अभियान में महिलाओं की भागीदारी अधिक रही। स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर चलाए गए कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों महिलाओं ने अक्षर ज्ञान प्राप्त किया।

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पूर्ण साक्षरता की ओर अंतिम कदम : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि अब शिक्षा विभाग का लक्ष्य शेष बचे 28,480 निरक्षर लोगों तक पहुंचना है। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हिमाचल पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाले राज्यों की सूची में शामिल होगा। हिमाचल की यह यात्रा केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के आत्मविश्वास, सम्मान और नए अवसरों की कहानी है जिन्होंने जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखने की इच्छा नहीं छोड़ी। 7.98 फीसदी से शुरू हुआ यह सफर अब 100 फीसदी साक्षरता की मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है।

राष्ट्रीय कार्यक्रम में योजना साझा करेगा हिमाचल
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर मंगलवार को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में हिमाचल अपनी योजना को साझा करेगा। प्रदेश में किस प्रकार साक्षरता दर बढ़ाने को काम किया गया। इसका उल्लेख किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर इस कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। उल्लास के नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौहान और शिक्षा निदेशक आशीष कोहली योजना की प्रस्तुति देंगे।

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