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Himachal News: प्राथमिक कृषि ऋण समितियां भी खोल सकेंगी लोकमित्र केंद्र, सरकार देगी आईडी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 14 Jan 2026 10:59 AM IST
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सार

सरकार ने ग्रामीण डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) आईडी देने का निर्णय लिया है। 

Himachal: Primary Agricultural Credit Societies will also be able to open Lokmitra Kendras
कंप्यूटर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) आईडी देने का निर्णय लिया है। इस फैसले से गांवों में रहने वाले लोगों को आधार, आय और जाति प्रमाण पत्र, पेंशन, बिजली-पानी के बिल भुगतान, बैंकिंग समेत कई सरकारी और ऑनलाइन सेवाएं अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध होंगी। सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जाए, खासकर उन पंचायतों में जहां अभी तक कोई लोक मित्र केंद्र (एलएमके) या सीएससी मौजूद नहीं है। इस संबंध में डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस (डीडीटी एंड जी) विभाग की राज्य स्तरीय समिति की बैठक शिमला में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक (आईटी) ने की। बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर से 195 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों ने सीएससी आईडी जारी करने के लिए आवेदन किया है।

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अब तक लोकमित्र केंद्र नीति में पैक्स, स्वयं सहायता समूह या अन्य संस्थाओं के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसी कारण इन आवेदनों पर निर्णय लेने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया, ताकि नीति-सम्मत और संतुलित फैसला लिया जा सके। चर्चा के बाद समिति ने निर्णय लिया कि पहले चरण में उन्हीं पंचायतों में स्थित पैक्स को सीएससी आईडी दी जाएगी, जहां अभी कोई लोक मित्र केंद्र या सीएससी कार्यरत नहीं है। इससे दुर्गम और पिछड़े इलाकों के लोगों को अपने गांव में ही डिजिटल सेवाएं मिल सकेंगी और उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए तहसील या शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब किसानों और आम ग्रामीणों को छोटे कार्यों के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा। पैक्स के माध्यम से गांवों में ही डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

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दूरी की शर्त तय, दूसरे चरण में विचार
दूसरे चरण में उन पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले से लोकमित्र केंद्र मौजूद हैं। ऐसे मामलों में सीएससी आईडी केवल उन्हीं पैक्स को दी जाएगी, जिनके केंद्र और नजदीकी एलएमके या सीएससी के बीच कम से कम एक किलोमीटर की दूरी हो। यह दूरी सड़क या पैदल रास्ते के अनुसार मापी जाएगी। समिति ने स्पष्ट किया कि बहुत पास-पास केंद्र खुलने से मौजूदा लोक मित्र संचालकों को आर्थिक नुकसान होता है और सेवाओं का समुचित उपयोग भी प्रभावित होता है। इसलिए दूरी की शर्त को आवश्यक माना गया।

मौके पर जाकर होगी भौतिक जांच
समिति ने साफ किया कि केवल दस्तावेजों के आधार पर सीएससी आईडी जारी नहीं की जाएगी। सीएससी एसपीवी की टीम प्रत्येक पैक्स केंद्र पर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी। जांच में केंद्र का स्थान, पंजीकृत पता और दूरी की शर्तों की पुष्टि की जाएगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सीएससी आईडी जारी की जाएगी।

पंजीकृत पते पर ही मिलेगा संचालन का अधिकार
निर्णय लिया गया कि पैक्स को सीएससी या लोक मित्र केंद्र खोलने की अनुमति केवल उसी पते पर दी जाएगी, जहां वह पहले से पंजीकृत है। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित होगा और अनधिकृत स्थानों पर केंद्र खोलने की संभावना समाप्त होगी।

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