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Himachal: जिस जमीन के लिए की ताया की हत्या, जांच में निकली वन भूमि, जानें पूरा मामला

दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 14 Jan 2026 09:58 AM IST
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सार

 पुलिस की जांच में चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस जमीन को लेकर यह सारा विवाद चल रहा था, वह असल में वन विभाग की भूमि निकली।

Himachal: The land for which the uncle was murdered turned out to be forest land; learn the full story.
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जमीन के विवाद ने एक परिवार को खून-खराबे तक पहुंचा दिया। एक युवक ने पीट-पीटकर अपने ही ताया की हत्या कर दी। पुलिस की जांच में चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस जमीन को लेकर यह सारा विवाद चल रहा था, वह असल में वन विभाग की भूमि निकली।

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ये है पूरा मामला
घटना हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्र खारा गांव की है, जहां एक परिवार के बीच जमीन को लेकर तनातनी थी। विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसा में बदल गया और भतीजे ने लाठी से अपने ही ताऊ पर हमला कर उनकी जान ले ली। घटना में आरोपी की पत्नी भी शामिल थी। अदालत में दायर चार्जशीट की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि विवादित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में वन भूमि दर्ज है।

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लात-घूंसों और डंडे से किए गए वार से घायल हुए थे भूरा राम
यह मामला माजरा थाना क्षेत्र में पंजीकृत है। 22 जनवरी 2025 को जमीन विवाद को लेकर सोम चंद (34) और उसकी पत्नी ने भूरा राम (66) के साथ मारपीट की थी। आरोप है कि मारपीट के दौरान लात-घूंसों और डंडे से किए गए वार से भूरा राम घायल हो गए थे। उन्हें पहले पांवटा साहिब, फिर नाहन और बाद में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। इलाज के बाद जब उनकी हालत बिगड़ी तो 15 फरवरी 2025 को नाहन अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

पैंक्रियास में गंभीर चोट को मौत का कारण माना
 पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एसएफएसएल मेडिकल रिपोर्ट में अग्न्याश्य (पैंक्रियास) में गंभीर चोट को मौत का कारण माना गया, जो कुंद वस्तु से लगी चोट के चलते हुई थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 103 (1), 117(2), 126(2), 115 (2), 3 (5) के तहत केस दर्ज कर जांच पूरी करने के बाद चालान अदालत में पेश किया।

आरोपी की जमानत याचिका खारिज
उधर, आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए जमानत की मांग की, लेकिन अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जमानत देने से न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है। 

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