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हिमाचल: स्नातक डिग्री कोर्स में इसी साल से सेमेस्टर सिस्टम से होगी पढ़ाई, राष्ट्रीय शिक्षा नीति होगी लागू

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 05 Apr 2026 11:52 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे यूजी डिग्री कोर्स में एनईपी-2020 के दिशा-निर्देशों के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाएगी। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Undergraduate degree courses to follow the semester system starting this year NEP to be implemented
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में शैक्षणिक सत्र-2026 से स्नातक डिग्री कोर्स में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करते हुए सेमेस्टर सिस्टम शुरू किया जाएगा। प्रदेश सचिवालय में शिक्षा सचिव डॉ. राकेश कंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसको लेकर निर्णय लिया गया। 

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बैठक में एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, एसपीयू मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में तय किया गया कि बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे यूजी डिग्री कोर्स में एनईपी-2020 के दिशा-निर्देशों के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा मिलेगी। वे पढ़ाई के दौरान कोर्स छोड़कर बाद में फिर से शुरू कर सकेंगे या एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में माइग्रेट कर सकेंगे।

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एनईपी के तहत छात्रों को अपने मनपसंद विषय चुनने की सुविधा प्रदेश के लगभग 29-30 बड़े और संसाधन संपन्न कॉलेजों में ही उपलब्ध होगी। वहीं चार वर्षीय यूजी डिग्री विद ऑनर एंड रिसर्च की सुविधा भी चयनित कॉलेजों में ही मिलेगी। छोटे कॉलेजों में संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर सीमित विषय ही पढ़ाए जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पसंदीदा मेजर, मल्टीडिसिप्लिनरी और कोर विषयों के लिए अपने शहर से बाहर बड़े कॉलेजों का रुख करना पड़ सकता है।

अब छात्रों को पसंद के विषयों और चार वर्षीय ऑनर और रिसर्च डिग्री के लिए बड़े और सुविधा संपन्न कॉलेजों में जाना होगा। छोटे कॉलेजों में पारंपरिक विषयों तक ही विकल्प सीमित रहेंगे।
 

स्नातक में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने को लेकर जल्द अधिसूचना जारी होगी। प्रवेश शेड्यूल और दिशा-निर्देश अलग से कॉलेजों को उपलब्ध करवाए जाएंगे।  -डॉ. राकेश कंवर, शिक्षा सचिव 

विश्वविद्यालय ने पहले वर्ष (दो सेमेस्टर) का पाठ्यक्रम तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है, ताकि कॉलेज समय रहते तैयारी कर सकें। प्रवेश संबंधी दिशा-निर्देश समय पर जारी करने होने चाहिए। इससे सेमेस्टर परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित नहीं होगी। -प्रो. महावीर सिंह, कुलपति, एचपीयू 

एनईपी के फायदे
लचीलापन : छात्र रुचि के अनुसार (मेजर, माइनर, मल्टीडिसिप्लिनरी) विषय चुन सकते हैं। 
एंट्री-एग्जिट : कोर्स बीच में छोड़ने पर भी सर्टिफिकेट डिप्लोमा/डिग्री मिलेगी। बाद में पढ़ाई शुरू करने का विकल्प।
कौशल बढ़ेगा : थ्योरी के साथ-साथ व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल पर जोर।

एनईपी की चुनौतियां
कम विकल्प : छोटे कॉलेजों में विषयों और संसाधनों की कमी के कारण छात्रों को सीमित विकल्प मिलेंगे।
बदलाव से भ्रम : नई प्रणाली को समझने में समय लगेगा। इससे शुरुआत में कन्फ्यूजन हो सकता है।
माइग्रेशन मजबूरी : पसंदीदा विषय या ऑनर-रिसर्च कोर्स के लिए दूसरे कॉलेजों में जाना पड़ सकता है।
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