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HP Assembly Budget Session: विधायक निधि नहीं मिलने पर गरमाया सदन, भाजपा विधायकों ने की नारेबाजी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 18 Feb 2026 04:54 PM IST
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सार

प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि बिना वित्तीय शक्तियों के हालात में रहने का क्या फायदा है। 

HP Assembly Budget Session: House heated up over nonreceipt of MLA funds, BJP MLAs raised slogans.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा शिमला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

विधायक निधि नहीं मिलने पर बुधवार को विधानसभा सदन गरमाया रहा। भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध जताया। प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि बिना वित्तीय शक्तियों के हालात में रहने का क्या फायदा है। क्या मैं इस्तीफा दे दूं। सरकार ने विधायक निधि रोक कर विधायकों को जीरो कर दिया है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा के समय हुए नुकसान की भरपाई के लिए विधायकों ने कई घोषणाएं की हैं। सरकार ने अब पैसा जारी करना बंद कर दिया है। पारित बजट भी नहीं दिया जा रहा। 31 मार्च से पहले यह राशि जारी होनी चाहिए।

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 मुख्यमंत्री सुक्खू ने ये कहा
जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 1.10 करोड़ रुपये के टोकन जल्द जारी कर दिए जाएंगे। आरडीजी पर चर्चा के बाद नेता विपक्ष सहित अन्य वरिष्ठ भाजपा विधायकों के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी। कितना पैसा दिया जा सकता है। ट्रेजरी के क्या हाल हैं। इसको लेकर बैठक में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी विधायक आरडीजी के मामले पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। उधर, जोगिंद्रनगर से भाजपा विधायक प्रकाश राणा पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक ने विकास कार्यों पर खर्च करने की जगह 543 महिला मंडलों को राशि क्यों दे दी। प्रावधान है कि कुल निधि का दस फीसदी ही इस प्रकार से बांटा जा सकता है। इसके बावजूद विधायक ने महिला मंडलों को पैसा दे दिया।

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महिला मंडलों को पैसा देना गलत नहीं है लेकिन जो विकास कार्य अधूरे हैं, वहां यह राशि खर्च करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विधायक प्रकाश राणा को वित्तीय तौर पर समर्थ हैं। ऐसे में उन्हें दान के तौर पर अपनी ओर से महिला मंडलों को पैसा देना चाहिए। विधायक निधि को विकास के काम पर खर्च करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने का सीधा असर राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की विधायक निधि और ऐच्छिक निधि जारी करने पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि प्रदेश के हित और विकास का प्रश्न है।

सदन की गरिमा तार-तार करने वालों को जनता देगी जवाब : परमार
 विधायक विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने और विधानसभा की गरिमा को तार-तार करने का गंभीर आरोप लगाया है। परमार ने कहा कि कांग्रेस अब मुद्दों से भटक चुकी है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सदन के भीतर स्तरहीन भाषा का प्रयोग कर रही है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर के खिलाफ की गई टिप्पणी केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि हिमाचल की जनता के जनादेश का अपमान है। जिस नेता को प्रदेश की जनता ने छह बार जीताकर सदन में भेजा, उसके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कांग्रेस की हताशा और बौखलाहट का प्रमाण है। कांग्रेस विधायक सुंदर ठाकुर की ओर से की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए विपिन सिंह परमार ने कहा कि जब सरकार के पास उपलब्धियों का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं होता, तब वह व्यक्तिगत कटाक्षों के सहारे सुर्खियां बटोरने की कोशिश करते हैं।

बात-बात पर आरडीजी का राग अलापना गलत : कटवाल
 झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने राजस्व घाटा अनुदान को लेकर प्रदेश सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि वित्तायोग का गठन नियम 280 के तहत होता है, जबकि आरडीजी से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा 275(1) का हवाला देकर शुरू की गई है। यह गलत है। आरडीजी केवल हिमाचल नहीं, बल्कि सभी राज्यों की बंद की गई है। इसे अपना हक बताने वाली प्रदेश सरकार को यह बात समझनी चाहिए कि नियम भी सभी के लिए होते हैं। जनरल कैटेगरी स्टेट्स की तुलना में हिमाचल को कहीं अधिक मदद मिल रही है। ऐसे में बात-बात पर आरडीजी का राग अलापना सही नहीं है।

विधानसभा में नियम 102 में आरडीजी से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपना काम बखूबी कर रही है। आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, मुफ्त रसोई गैस, मुफ्त राशन, वन रैंक-वन पेंशन, आवास, शौचालय व किसान सम्मान जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं सुचारू तरीके से चलाकर विकसित भारत के माॅडल को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। जनरल कैटेगरी स्टेट्स की तुलना में केंद्रीय प्रायोजित कई बड़ी योजनाओं में हिमाचल की हिस्सेदारी केेवल 90ः10 या 80ः20 तय की गई है। टैक्स शेयर 32 से बढ़ाकर 41 फीसदी किया गया है। जीएसटी कलेक्शन में भी वृद्धि हुई है। पहले यह 3-4 हजार करोड़ रुपये थी, जबकि अब लगभग 14 हजार करोड़ रुपये आएगी। अपनी नाकामियों पर पर्दा डालकर जिम्मेदारियों से पल्लू झाड़ने के बजाए प्रदेश सरकार को केंद्र से सीख लेनी चाहिए।

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