Himachal: मुकेश बोले- केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के 37.85 करोड़ से धर्मपुर-सराज में बना दिए 19 रेस्ट हाउस
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने जल जीवन मिशन के 37.85 करोड़ रुपये से धर्मपुर-सराज में 19 रेस्ट हाउस बना दिए।
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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने जल जीवन मिशन के 37.85 करोड़ रुपये से धर्मपुर और सराज में 19 रेस्ट हाउस बना दिए। भारत सरकार का मत स्पष्ट है कि मिशन के माध्यम से ऐसे निर्माण नहीं हो सकते। ऐसे में अब राज्य सरकार को यह खर्च उठाना होगा। भारत सरकार ने रेस्ट हाउस निर्माण के लिए धनराशि देने से मना कर दिया है। उन्होंने बताया कि धर्मपुर में सात रेस्ट हाउस तैयार हैं और पांच निर्माणाधीन हैं। सराज में छह तैयार और एक का निर्माण जारी है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में बने इन रेस्ट हाउस की देखरेख पर 1.42 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। पूर्व सरकार की इस कार्यप्रणाली का खामियाजा अब हमें भुगतना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में कैबिनेट की मंजूरी के बिना कहीं भी रेस्ट हाउस का निर्माण नहीं किया जाएगा।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने पूर्व सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार में समझ रखने वालों ने समझदारी क्यों नहीं दिखाई। उनके क्षेत्र में 42 पेयजल योजनाओं पर काम शुरू हुआ था। चार तैयार हो गई हैं, 10 का काम थोड़ा सा बचा है। शेष योजनाएं अधूरी ही हैं। जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई कई योजनाएं पूरी ही नहीं हुई हैं। इस संबंध में कई बार केंद्रीय मंत्री से भी बात की गई है, लेकिन केंद्र का कहना है कि आपने तो बता दिया था कि मिशन पूरा हो गया है, इसलिए यह पैसा रोका गया है। उधर, भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि भविष्य में इस बात का ख्याल रखा जाए कि किसी और कार्य के लिए बजट का कहीं और उपयोग न हो। कैबिनेट को इस बाबत कड़े नियम बनाने चाहिए।
भारत सरकार ने दिए निशुल्क पानी सप्लाई नहीं देने के निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने शर्त लगाई है कि जल जीवन मिशन का शेष बजट चाहिए तो निशुल्क पानी सप्लाई नहीं देना होगा। मंत्रालय का कहना है कि कम से कम 100 रुपये का मासिक बिल लिया जाए। आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग से 30 रुपये बिल लेने को कहा है। इसके अलावा टैंक से आगे पानी की सप्लाई देने का काम भी पंचायतीराज विभाग को देने के लिए कहा गया है। यह सभी मामले सरकार के विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में मिशन के तहत हिमाचल को 6395 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। इसमें से 5167 करोड़ प्राप्त हुए। करीब 1227 करोड़ नहीं मिला था। 1747 स्कीमें मंजूर हुई थी। 1100 स्कीमें चल रही हैं। पूर्व की राज्य सरकार ने भारत सरकार को लिखकर दे दिया कि प्रदेश में मिशन पूरा हो चुका है। इस कारण 1227 करोड़ नहीं मिले।