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HP Assembly Session: कुलदीप राठौर बोले-अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क शून्य हुआ तो बर्बाद हो जाएंगे बागवान

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 31 Mar 2026 07:11 PM IST
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सार

केंद्र सरकार अमेरिका से सेब आयात को लेकर जो भी समझौता करे, उसमें अनिवार्य तौर पर हिमाचल को शामिल किया जाना चाहिए। 

HP Assembly Session:  Kuldeep Rathore Says: If Import Duty on American Apples Drops to Zero, Orchardists Will
ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में अगर वाशिंगटन सेब पर आयात शुल्क शून्य किया गया तो हिमाचल के सेब बागवान बर्बाद हो जाएंगे। केंद्र सरकार अमेरिका से सेब आयात को लेकर जो भी समझौता करे, उसमें अनिवार्य तौर पर हिमाचल को शामिल किया जाना चाहिए। मंगलवार को विधानसभा में ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने इस विषय पर संकल्प रखा। राठौर ने कहा कि हिमाचल के 2 लाख परिवार सेब बागवानी से जुड़े हैं। हिमाचल की आर्थिकी पूरी तरह सेब पर निर्भर है। अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड डील को लेकर जो सूचनाएं मिल रही हैं उनमें वाशिंगटन सेब पर आयात शुल्क शून्य करने की तैयारी की चर्चा चल रही है। अगर ऐसा होता है तो इससे हिमाचल के बागवानों के लिए आत्मदाह की स्थिति बन जाएगी।

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केंद्र सरकार सेब के मसले पर जो चर्चा कर रही है उसमें सेब राज्यों हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इसे लेकर पक्ष और विपक्ष को एक जुट होकर विधानसभा से संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजना चाहिए कि सेब आयात को लेकर जो भी फैसला हो उसमें प्रदेश को शामिल किया जाए। अमेरिका के दबाव में आकर केंद्र सरकार हिमाचल की आर्थिकी को बरबाद करने पर तुली है। ट्रंप के दबाव में केंद्र सरकार फैसले ले रही है जो सही नहीं है। सेब उत्पादन को लेकर हिमाचल की तुलना अमेरिका के वाशिंगटन से नहीं हो सकती। हिमाचल में जहां अधिकांश सेब के बगीचे एक से दो एकड़ में लगे हैं वहीं अमेरिका में औसत बगीचे 100 एकड़ में लगे हैं। अमेरिका में सालाना औसतन सेब उत्पादन 50 से 80 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि हिमाचल में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 6 से 7 टन है।

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एफटीए सिर्फ सेब पर नहीं, अन्य फल और कृषि उत्पाद भी शामिल
मंडी से विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण मामला है और इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ सेब पर ही नहीं किया जा रहा, अन्य फल और कृषि उत्पाद भी इसमें शामिल है। बहुत से क्षेत्रों में यह देश के लिए लाभप्रद भी साबित होगा।

एफटीए समझौते के खिलाफ संकल्प प्रस्ताव पारित, केंद्र को भेजने पर सहमति
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सेब के गैर प्रमाणित पौधों की सप्लाई करने वालों पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। हिमाचल में सेब की आर्थिकी को देखते हुए शिवा की तरह हाइडेंसिटी प्रोजेक्ट की जरूरत है। एमआईएस स्कीम में बहुत खामियां हैं, इसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है। एफटीए पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इस प्रस्ताव को केंद्र को भेजा जाए। संकल्प प्रस्ताव का सत्ता पक्ष और विपक्ष ने समर्थन करते हुए एक मत के साथ इस पारित कर दिया गया और इसे केंद्र को भेजने पर सदन ने स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में एमआईएस के तहत छोटे बागवान जिनकी सेब की खरीद कम होगी, उन्हें डीबीटी के माध्यम से खातों में पैसा डाल दिया जाएगा। एमआईएस केंद्र की योजना है। केंद्र इसमें मदद नहीं कर रहा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने बागवानों के हित सुरक्षित करने के लिए केंद्र को करीब 10 प्रस्ताव भेजे है, जिसमें 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने की मांग की गई है। जुलाई से सितंबर तक विदेशी सेब के आयात पर रोक लगाने की मांग की गई है। विश्व व्यापार संगठन व मुक्त व्यापार समझौता के तहत सेब के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध/सीमा लगाई जाए। देश में ईरान व अफगानिस्तान के मार्ग से मुक्त व्यापार समझौता के तहत प्रवेश करने वाले सेब के फलों के अनधिकृत व्यापार से बचने के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना शामिल है। नेगी ने कहा कि भाजपा यूनिवर्सल कार्टन की विरोधी है। कांग्रेस सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन की शुरुआत की। अगर फलदार पेड़ को नुकसान होता है तो इसके लिए सरकार ने फसल बीमा योजना लागू है, जिसके तहत बागवानों को 700 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति पेड़ नुकसान का दिया जाता है।

केंद्र को भेजा जाए प्रस्ताव : शिक्षा मंत्री
गैर सरकारी सदस्य संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि महत्वपूर्ण संकल्प सदन में लाया है। केंद्र के समक्ष इस मामले को उठाए जाने की आवश्यकता है। विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि चीन और ईरान से कम मात्रा में सेब आ रहा है। इससे हिमाचल के सेब को फायदा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानों को घटिया दवाइयां दी जा रही है। इससे पानी दूषित हो रहा है। कैंसर जैसी बीमारियां होने की संभावना बन रही है।

परियोजना प्रभावितों को नहीं मिल रहा रोजगार, सरकार को नियम सख्त करने की जरूरत
 प्रदेश में निर्माणाधीन और संचालित जल विद्युत परियोजनाओं के सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों के आधार पर रोजगार सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाने को लेकर भाजपा विधायक विधायक जनक राज ने मंगलवार को सदन में संकल्प प्रस्ताव लाया। उन्होंने कहा कि संचालित परियोजनाओं का प्रभाव उन जगहों पर पड़ता है, जहां स्थानीय लोगों के घरों, जमीनों के पास यह निर्माण कार्य होता है। कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में परियोजनाओं के प्रति लोगों में आक्रोश है। प्रभावितों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। निर्माणाधीन परियोजना शिवालिक पावर हाइड्रो में काम कर रही कंपनी भाग गई है और लोगों की देनदारियां बाकी हैं। बरसात में बाढ़ और गाद से स्थानीय लोगों की संपत्तियां बर्बाद हो रही हैं। लोगों की शिकायत के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। हिमाचल में स्थानीय लोगों के लिए 70 फीसदी रोजगार की पाॅलिसी है। कंपनियां लेबर के तौर पर 70 फीसदी स्थानीय लोगों को भर लेती हैं, लेकिन बड़े पदों पर नहीं रखे जाते। उन्होंने सरकार से मांग है कि होली और धरवाला में आईटीआई खोले। नदियों के किनारे परियोजनाओं का मलबा न डाला जाए। इसको लेकर सरकार को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है। टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हिमाचल को बीबीएमबी में अधिकार नहीं मिले हैं। पुनर्स्थापितों को जमीन नहीं दी गई। भाखड़ा से उजड़े लोग राजस्थान गए। वहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। प्रभावित लोगों को रोजगार मिलना चाहिए। लोगों के जो हक है, इन्हें मिलना चाहिए।

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