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Hanuman Janmotsav: हनुमान जयंती पर आशीर्वाद लेने जाखू पहुंचे सीएम सुक्खू और नेता विपक्ष, जानें क्या बोले

एएनआई, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 02 Apr 2026 01:40 PM IST
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सार

2 अप्रैल 2026, गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जिसके चलते गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जाखू पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर...

Hanuman Janmotsav CM Sukhu and the Lop Jairam Thakur Visit Jakhu to Seek Blessings on Hanuman Jayanti
सीएम सुक्खू पत्नी संग, नेता विपक्ष पत्नी संग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जाखू पहुंचे।  
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इस दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आज हनुमान जयंती है। निश्चित रूप से हनुमान से जो हमें प्रेरणा मिलती है उसके संदर्भ में मत्था टेकने आए हैं।
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वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हनुमान जयंती के अवसर पर जाखू हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि हनुमान जयंती पर सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचे हैं। हनुमान जी हम सबकी रक्षा करें सभी को शक्ति दें, प्रदेश के आगे बढ़ने के लिए बल दें, मैं ऐसी कामना करता हूं।
 

इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी जाखू मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं सभी प्रदेशवासियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। मैं कमाना करता हूं प्रभु राम और हनुमान का आशीर्वाद सभी पर बना रहे। प्रदेश में जो दिक्कतें आई हैं उससे प्रदेश को बाहर निकाला जा सके। प्रदेश में खुशहाली हो।
 
ये भी पढ़ें- Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव आज, जानें किन राशि वालों की चमकेगी किस्मत और किसकी बढ़ेगी टेंशन

जाखू मंदिर की कहानी
जाखू मंदिर का इतिहास भी रामायण काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि उस समय जब हनुमान संजीवनी बूटी लाने जा रहे थे तब वह इस पहाड़ी पर कुछ देर के लिए रुके थे। यहां ऋषि यक्ष से उनकी मुलाकात हुई थी। हनुमान ने लौटते वक्त उनसे मिलने का वादा किया था लेकिन कालनेमि राक्षस के कारण देरी हो गई और वह उनसे नहीं मिल पाए थे। इसके बाद जब हनुमान वापस आए तो उन्होंने ऋषि यक्ष को दर्शन दिए और एक स्वयंभू मूर्ति यानी प्रकट हुई थी। संकट मोचन मंदिर के प्रबंधक अनूप चौहान ने बताया कि संकट मोचन मंदिर की स्थापना वर्ष 1962 के आसपास बाबा नीब करौरी ने की थी।
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