किशाऊ बांध: सुक्खू बोले- हिमाचल ने अपने हितों को सुरक्षित किया, 2,000 करोड़ का बोझ लाभार्थी राज्यों पर डाला
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में केंद्र सरकार सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमत हुई है कि राज्य के हिस्से की बिजली परियोजना पर आने वाली 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का बोझ इस परियोजना के पानी के हिस्से से लाभ उठाने वाले राज्यों- दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा की ओर से उठाया जाएगा।
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किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मंगलवार को नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान राज्यों ने 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित टोंस नदी पर 15,624 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस परियोजना का निर्माण किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए।
मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था: सीएम
मुख्यमंत्री ने मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से बिजली घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्यों की ओर से वहन करने पर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने के लिए इस मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था।
राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए 800 के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रमुखता से इस पक्ष को उठाया कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है और इस स्थिति में बिजली घटक के लिए इस प्रकार की सहायता उपलब्ध न करवाना अनुचित है।
हिमाचल को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा: सीएम
उन्होंने कहा कि परियोजना के कारण प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और इस परियोजना से हिमाचल को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना अनुचित है और राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के बहुमूल्य योगदान की समुचित भरपाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है, जो राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा विभिन्न मंचों पर प्रदेश के हितों को प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना में राज्य के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी को सुरक्षित करना प्रदेश के हितों की रक्षा के संघर्ष में एक बड़ी जीत है। इस अवसर पर मुख्य सचिव केके पंत तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम भी उपस्थित थे।