सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Mid day meal workers raise their voices in Shimla; demand payment of the ₹7,000 honorarium throughout the year

Shimla: शिमला में गरजे मिड-डे मील कर्मी, सात हजार मानदेय पूरे साल देने की मांग

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 22 Jun 2026 07:06 PM IST
विज्ञापन
सार

मिड-डे मील वर्कर टॉलैंड में एकत्र हुए, यहां से नारेबाजी करते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया।

Mid day meal workers raise their voices in Shimla; demand payment of the ₹7,000 honorarium throughout the year
शिमला में गरजे मिड-डे मील कर्मी। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार

मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू संबंधित) ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी 12 माह के वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग को जोरशोर से उठाया। मिड-डे मील वर्कर टॉलैंड में एकत्र हुए, यहां से नारेबाजी करते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया। सीटू के राष्ट्रीय सचिव कश्मीर सिंह ठाकुर और राज्य महासचिव प्रेम गौतम ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकारें मिड-डे मील योजना को कमजोर कर रही हैं। स्कूलों के विलय, बंद करने, क्लस्टर योजना और केंद्रीय किचन जैसी नीतियों से हजारों कर्मियों का रोजगार खतरे में है। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के राज्य अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्मियों को 10 माह के बजाय 12 माह का वेतन देने का फैसला दिया था। इस फैसले को एकल पीठ और खंडपीठ दोनों ने बरकरार रखा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार इसे लागू करने के बजाय उच्चतम न्यायालय पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि 25 बच्चों की शर्त, ठेकाकरण और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से निजीकरण भी रोजगार के लिए खतरा है। यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी।


कम मानदेय और 17 वर्षों से वृद्धि नहीं

यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में 21 हजार के करीब मिड-डे मील कर्मी कार्यरत हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले 1,000 रुपये को मिलाकर मात्र 5,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी केवल 10 महीनों के लिए दिया जाता है। पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है। यह स्थिति कर्मियों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन की मांग

कर्मियों ने हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन की मांग की है। वे 12 माह का वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सुविधाएं भी चाहते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 आकस्मिक अवकाश, दो वर्दियां और समय पर वेतन भुगतान की भी मांग की गई। यूनियन ने 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने और जमा दो तक योजना का विस्तार करने की भी अपील की। उन्होंने क्लस्टर योजना के नाम पर छंटनी रोकने की मांग की।

विज्ञापन

सरकार को सौंपा मांगपत्र, आंदोलन की दी चेतावनी

रैली के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश को मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मिड-डे मील कर्मियों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। मुख्य सचिव ने जल्द ही शिक्षा मंत्री से बैठक करने का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और संघर्ष को व्यापक रूप दिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed