Shimla: शिमला में गरजे मिड-डे मील कर्मी, सात हजार मानदेय पूरे साल देने की मांग
मिड-डे मील वर्कर टॉलैंड में एकत्र हुए, यहां से नारेबाजी करते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
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मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू संबंधित) ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी 12 माह के वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग को जोरशोर से उठाया। मिड-डे मील वर्कर टॉलैंड में एकत्र हुए, यहां से नारेबाजी करते हुए सचिवालय पहुंचे। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया। सीटू के राष्ट्रीय सचिव कश्मीर सिंह ठाकुर और राज्य महासचिव प्रेम गौतम ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकारें मिड-डे मील योजना को कमजोर कर रही हैं। स्कूलों के विलय, बंद करने, क्लस्टर योजना और केंद्रीय किचन जैसी नीतियों से हजारों कर्मियों का रोजगार खतरे में है। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के राज्य अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्मियों को 10 माह के बजाय 12 माह का वेतन देने का फैसला दिया था। इस फैसले को एकल पीठ और खंडपीठ दोनों ने बरकरार रखा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार इसे लागू करने के बजाय उच्चतम न्यायालय पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि 25 बच्चों की शर्त, ठेकाकरण और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से निजीकरण भी रोजगार के लिए खतरा है। यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी।
कम मानदेय और 17 वर्षों से वृद्धि नहीं
यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में 21 हजार के करीब मिड-डे मील कर्मी कार्यरत हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले 1,000 रुपये को मिलाकर मात्र 5,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी केवल 10 महीनों के लिए दिया जाता है। पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है। यह स्थिति कर्मियों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर रही है।
हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन की मांग
कर्मियों ने हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन की मांग की है। वे 12 माह का वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सुविधाएं भी चाहते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 आकस्मिक अवकाश, दो वर्दियां और समय पर वेतन भुगतान की भी मांग की गई। यूनियन ने 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने और जमा दो तक योजना का विस्तार करने की भी अपील की। उन्होंने क्लस्टर योजना के नाम पर छंटनी रोकने की मांग की।
सरकार को सौंपा मांगपत्र, आंदोलन की दी चेतावनी
रैली के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश को मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मिड-डे मील कर्मियों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। मुख्य सचिव ने जल्द ही शिक्षा मंत्री से बैठक करने का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और संघर्ष को व्यापक रूप दिया जाएगा।
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