सियासी हलचल: वीरभद्र के नाम पर पार्टी बनाने की कवायद पर प्रतिभा ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया
वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं मंडी की पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक दल बनाने की कथित कोशिशों पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
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हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नाम और राजनीतिक विरासत को लेकर नई सियासी हलचल शुरू हो गई है। वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं मंडी की पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक दल बनाने की कथित कोशिशों पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग कादरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर वीरभद्र सिंह के नाम या उनकी पहचान से जुड़े नाम पर किसी राजनीतिक दल के गठन और पंजीकरण को मंजूरी न देने का आग्रह किया है।
बुधवार को भेजे पत्र में प्रतिभा सिंह ने मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल कर हिमाचल के लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस और वीर कांग्रेस नामों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिभा सिंह ने आयोग से कहा है कि उन्हें किसी व्यक्ति या समूह के राजनीतिक दल बनाने के अधिकार पर आपत्ति नहीं है, लेकिन उनके दिवंगत पति के नाम और राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसे किसी राजनीतिक दल के गठन के लिए अनुमति या सहमति दी है।
पत्र में प्रतिभा सिंह ने केवल वीरभद्र नाम से बनने वाले दलों के अलावा राजा, बुशहर और राजा बुशहर जैसे नामों से राजनीतिक दल बनाए जाने की कथित कोशिशों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने इन नामों को वीरभद्र सिंह की पारिवारिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा बताते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप का आग्रह किया है। पत्र में कहा है कि वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। ऐसे में उनकी पहचान और नाम आज भी प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके नाम से मिलते-जुलते नामों पर राजनीतिक दल बनाए जाने की चर्चा को उन्होंने गंभीरता से लिया है।
निर्णय से पहले सुनवाई की मांग
प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस, वीर कांग्रेस या इसी तरह के किसी नाम से दल के गठन या पंजीकरण को मंजूरी न दी जाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि भविष्य में वीरभद्र सिंह के नाम या उससे मिलते-जुलते नाम से किसी दल के पंजीकरण का आवेदन आने पर निर्णय लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।