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Shimla News: बारिश से डेढ़ महीने के सूखे से राहत
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शिमला के रिज मैदान पर बारिश के दौरान घुमते सैलानी ।फोटो संवाद
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बारिश न होने से गेहूं और फलों की फसल हो रही थी प्रभावित
सेब और प्लम के फूलों पर सूखे का पड़ रहा था असर
बगीचों में लगाए नए पौधे सूखने के थे कगार पर
बागवानों ने बेहतर फलों की सेटिंग की जताई उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों और बागवानों के लिए बारिश संजीवनी बनकर बरसी है। करीब डेढ़ महीने से चल रहे सूखे के कारण खेतों में गेहूं और बगीचों में सेब की फसल प्रभावित होने लगी थी, वहीं अब बारिश से हालात में सुधार की उम्मीद जगी है।
जिला में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण मिट्टी में नमी की कमी हो गई थी। इसका सीधा असर खेती और बागवानी पर पड़ रहा था। गेहूं की बढ़वार धीमी हो गई थी, जबकि सेब और प्लम के पेड़ों पर आए फूल भी सूखे मौसम के कारण प्रभावित होने लगे थे। सूखा पड़ने से सेब के पौधों में कैंकर रोग की आशंका भी बढ़ने लगी थी।
फरवरी में हल्की बारिश होने के बावजूद जमीन में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई थी, जिससे बगीचों में लगाए गए सेब और स्टोन फ्रूट के नए पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए थे। सूखे के कारण फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही थी। इससे उत्पादन घटने की चिंता बनी हुई थी। अब बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने से फसल की बढ़वार में सुधार होने की संभावना है।
ठियोग के बागवान प्रताप चौहान और रमेश वर्मा ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश से किसानों और बागवानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन बगीचों में फलों की बेहतर सेटिंग के लिए अभी और बारिश की आवश्यकता है। बागवानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो इस वर्ष सेब और अन्य फलों का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है।
धूल और गर्मी से मिली राहत
लंबे समय बाद हुई बारिश और ओले पड़ने से लगातार बढ़ रही गर्मी और हवा में फैली धूल से भी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से दिन के दौरान तपती धूप के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ गई थीं, लेकिन रविवार दोपहर बाद शुरू हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया।
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सेब और प्लम के फूलों पर सूखे का पड़ रहा था असर
बगीचों में लगाए नए पौधे सूखने के थे कगार पर
बागवानों ने बेहतर फलों की सेटिंग की जताई उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों और बागवानों के लिए बारिश संजीवनी बनकर बरसी है। करीब डेढ़ महीने से चल रहे सूखे के कारण खेतों में गेहूं और बगीचों में सेब की फसल प्रभावित होने लगी थी, वहीं अब बारिश से हालात में सुधार की उम्मीद जगी है।
जिला में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण मिट्टी में नमी की कमी हो गई थी। इसका सीधा असर खेती और बागवानी पर पड़ रहा था। गेहूं की बढ़वार धीमी हो गई थी, जबकि सेब और प्लम के पेड़ों पर आए फूल भी सूखे मौसम के कारण प्रभावित होने लगे थे। सूखा पड़ने से सेब के पौधों में कैंकर रोग की आशंका भी बढ़ने लगी थी।
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फरवरी में हल्की बारिश होने के बावजूद जमीन में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई थी, जिससे बगीचों में लगाए गए सेब और स्टोन फ्रूट के नए पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए थे। सूखे के कारण फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही थी। इससे उत्पादन घटने की चिंता बनी हुई थी। अब बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने से फसल की बढ़वार में सुधार होने की संभावना है।
ठियोग के बागवान प्रताप चौहान और रमेश वर्मा ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश से किसानों और बागवानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन बगीचों में फलों की बेहतर सेटिंग के लिए अभी और बारिश की आवश्यकता है। बागवानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो इस वर्ष सेब और अन्य फलों का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है।
धूल और गर्मी से मिली राहत
लंबे समय बाद हुई बारिश और ओले पड़ने से लगातार बढ़ रही गर्मी और हवा में फैली धूल से भी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से दिन के दौरान तपती धूप के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ गई थीं, लेकिन रविवार दोपहर बाद शुरू हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया।