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Himachal: बिलासपुर में चोरी की गाड़ियों का पंजीकरण, वरिष्ठ सहायक गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 21 Jan 2026 10:05 AM IST
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सार

बिलासपुर क्षेत्रीय लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण प्राधिकरण (आरएलए) कार्यालय में चोरी की गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत करने के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। 

Registration of stolen vehicles in Bilaspur: Senior assistant arrested; know the full story.
अपराध(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर क्षेत्रीय लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण प्राधिकरण (आरएलए) कार्यालय में चोरी की गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत करने के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में बिलासपुर में तैनात एक वरिष्ठ सहायक (सीनियर असिस्टेंट) को गिरफ्तार किया है। आरोपी को अदालत में पेश कर सात दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि यह एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट है, जिसके तार हिमाचल प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों के आरएलए कार्यालयों से जुड़े हुए हैं। 

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दिल्ली क्राइम ब्रांच लंबे समय से एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह की तलाश कर रही थी, इसी दौरान बिलासपुर से जुड़े अहम सुराग हाथ लगे। जांच में पता चला कि दिल्ली और अन्य राज्यों से चोरी की गई गाड़ियों को बिलासपुर आरएलए में फर्जी कागजातों के जरिये फर्स्ट हैंड दिखा पंजीकृत किया जा रहा था। जब क्राइम ब्रांच ने संदिग्ध वाहनों के रिकॉर्ड और वैध दस्तावेज मांगे, तो संबंधित वरिष्ठ सहायक उन्हें प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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गिरोह में कई और अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं
जांच अधिकारी के अनुसार इस गिरोह में कई और अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। आरोपी से उन मुख्य सरगनाओं के नाम उगलवाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरे सिंडिकेट को संचालित कर रहे हैं। पुलिस को हिमाचल के अन्य जिलों में भी इस नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में फर्जी पंजीकरण के बदले मोटी रकम और अवैध वसूली के साक्ष्य भी मिले हैं। आरोपी कर्मचारी पहले आरएलए शाखा में डीलिंग हैंड के पद पर तैनात था। आरोप है कि इसी दौरान उसने नियमों की अनदेखी करते हुए चोरी की गाड़ियों के चेसिस नंबर और दस्तावेजों में हेरफेर की। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि और कौन-कौन लोग इस फर्जीवाड़े में शामिल थे। 

पहले भी विवादों में रहा है लग्जरी वाहनों का पंजीकरण
यह पहला मामला नहीं है जब हिमाचल में वाहन पंजीकरण को लेकर सवाल खड़े हुए हों। वर्ष 2021 में पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की ओर से अपनी करीब डेढ़ करोड़ की मर्सिडीज कार को नूरपुर में पंजीकृत करवाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। पंजीकृत वाहन को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए थे कि दिल्ली निवासी खिलाड़ी ने हिमाचल में वाहन पंजीकरण क्यों कराया। सूत्रों के अनुसार, देश की कई बड़ी हस्तियां और रसूखदार लोग टैक्स में छूट पाने के लिए हिमाचल में लग्जरी वाहनों का पंजीकरण कराते हैं। अन्य राज्यों की तुलना में यहां रजिस्ट्रेशन फीस कम होने के कारण लोग स्थानीय हाउस रेंट एग्रीमेंट, व्यावसायिक साझेदारी या संस्थानों से जुड़े दस्तावेज दिखाकर औपचारिकताएं पूरी करते हैं। कई मामलों में फर्जी निवास प्रमाण पत्र और रेंट डीड का भी सहारा लिया जाता है।

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