राहत की खबर: शिमला में सैहब कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल; शुक्रवार से काम पर लाैटेंगे, बैठक में फैसला
तनख्वाह बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैहब कर्मचारियों ने 7 दिन बाद गुरुवार को अपनी हड़ताल खत्म कर दी है। शुक्रवार से यह सभी कर्मचारी काम पर लौट आएंगे।
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शिमला शहरवासियों के लिए राहत की खबर है। तनख्वाह बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैहब कर्मचारियों ने 7 दिन बाद गुरुवार को अपनी हड़ताल खत्म कर दी है। शुक्रवार से यह सभी कर्मचारी काम पर लौट आएंगे। इससे शहर में घरों से कूड़ा उठने का काम शुरू हो जाएगा। महापौर सुरेंद्र चौहान के साथ गुरुवार दोपहर टाउन हॉल में लिखित समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने का एलान किया। इससे पहले सुबह 10:00 बजे कर्मचारी यूनियन ने सीटीओ चौक पर प्रदर्शन किया और 41 कर्मचारियों को बर्खास्त करने पर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर 12:00 बजे महापौर सुरेंद्र चौहान ने कर्मचारियों को बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगें उठाईं जिस पर महापौर ने कहा कि वह भी इन्हें पूरा करने के समर्थन में है।
इसे बाकायदा 4 जून को होने वाली एजीएम की बैठक में उठाया जाएगा। इसको लेकर एक लिखित समझौता भी कर्मचारियों को सौंपा गया। इसमें 10 फीसदी वेतन बढ़ोतरी, 15 दिन की विशेष छुट्टियां देने, 4-9-14 का लाभ सभी कर्मचारियों को देने पर सहमति बनी है। वहीं बुधवार को जिन 41 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था, उनकी सेवाएं बहाल करने के भी महापौर ने निर्देश जारी कर दिए हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यह सभी कर्मचारी भी काम पर लौट सकेंगे। कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि अगर 4 जून को होने वाली एजीएम में यह फैसले नहीं हुए तो 5 जून से कर्मचारी दोबारा से हड़ताल पर चले जाएंगे। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि वह पहले से कर्मचारियों को इन मांगों को पूरा करने का भरोसा दे रहे थे। अब लिखित समझौता भी किया गया है। 4 जून की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा। इस बारे में मुख्यमंत्री से भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार से शहर से कूड़ा उठाने का काम शुरू हो जाएगा। इससे शहरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कूड़ा नहीं उठने से शहर में चरमरा गई थी सफाई व्यवस्था, निगम ने लगाए बड़े ट्रक
शहर में पिछले सात दिनों से घर-घर से कूड़ा नहीं उठने से सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई थी। हालत यह थी कि शहर की सड़कों के साथ ही कलेक्शन प्वाइंट पर भी कड़े के ढेर लग गए थे। इस वजह से देश-विदेश से शिमला आने वाले सैलानियों के सामने भी पहाड़ों की रानी की छवि खराब हो रही थी। घरों में अधिक कूड़ा होने के कारण मजबूरी में लोग कलेक्शन प्वाइंट के साथ ही यहां-वहां कूड़ा फेंक रहे थे। हालांकि निगम ने कलेक्शन प्वाइंट से कड़ा उठाने का दावा किया था और क्षमता के मुताबिक इस काम को किया भी जा रहा था फिर भी सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट रही थी। गुरुवार को कलेक्शन प्वाइंटों से कूड़ा उठाने के लिए बड़े ट्रकों का इस्तेमाल भी किया गया था।
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