शिमला: राज्य शिक्षक पुरस्कार चयन पर सवाल, पत्र भेजकर राज्यपाल से जांच की मांग
विभिन्न जिलों के 11 शिक्षकों के एक समूह ने राज्यपाल को पत्र भेजकर पुरस्कार चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं।
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हिमाचल प्रदेश के वर्ष 2026 के राज्य शिक्षक पुरस्कारों के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभिन्न जिलों के 11 शिक्षकों के एक समूह ने राज्यपाल को पत्र भेजकर पुरस्कार चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं। शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की है। राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में शिक्षकों अंजु लता, सुमन शर्मा, संजीव मनकोटिया, प्रवीण कुमारी, राजेश कुमार, संध्या चौहान, लाल चंद, पायल थापा, साधना शर्मा और विवेकानंद ने कहा है कि उन्हें राज्य की संवैधानिक संस्थाओं और शिक्षा व्यवस्था पर पूरा विश्वास है, लेकिन अंतिम चयन सूची में सामने आए कुछ तथ्यों ने पात्र एवं योग्य शिक्षकों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और अधिसूचित मानदंडों का समान रूप से पालन नहीं किया गया। ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप लगाया गया है कि डाइट शिमला के प्रधानाचार्य वीरेंद्र चौहान का नाम कथित तौर पर 29 अगस्त को आयोजित साक्षात्कार के लिए जारी शॉर्टलिस्ट में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में उनका नाम अंतिम राज्य शिक्षक पुरस्कार सूची में शामिल कर लिया गया। शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि यदि चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार अनिवार्य था तो बिना इंटरव्यू के किसी अभ्यर्थी का चयन किस आधार पर किया गया।
सामान्य और विशेष पुरस्कार श्रेणियों पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि विशेष पुरस्कार श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले कुछ शिक्षकों को बाद में सामान्य पुरस्कार श्रेणी में चयनित दिखाया गया। इनमें सृष्टि शर्मा (जेबीटी), किरण कुमार (डीएम), संजय कुमार नेगी (जेबीटी) और लोकेन्द्र सिंह (सीएचटी) के नाम शामिल हैं। शिक्षकों ने दावा किया है कि अधिसूचना में पुरस्कारों का स्पष्ट श्रेणीवार वितरण निर्धारित किया गया था, लेकिन अंतिम परिणाम में इसका पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
दूसरे राज्य शिक्षक पुरस्कार पर भी आपत्ति
पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि अधिसूचना के अनुसार कोई शिक्षक राज्य शिक्षक पुरस्कार दोबारा प्राप्त करने का पात्र नहीं है। इसके बावजूद जेबीटी शिक्षिका सृष्टि शर्मा को कथित रूप से दूसरी बार यह पुरस्कार प्रदान किए जाने का मामला सामने आया है। शिक्षकों ने इसकी पात्रता और नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की है।
31 पुरस्कारों की जगह 21 नामों पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि अधिसूचित व्यवस्था के अनुसार 16 पुरस्कार सामान्य क्षेत्र, नौ जनजातीय क्षेत्र और छह विशेष श्रेणी के लिए निर्धारित थे, यानी कुल 31 पुरस्कारों का प्रावधान था। हालांकि अंतिम चयन सूची में 21 पुरस्कार ही दे रहे हैं। शिक्षकों ने मांग की है कि अधिसूचना और अंतिम चयन सूची के बीच अंतर की जांच की जाए।