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नगर निकाय अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव: CJI ने हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, विधायकों के वोटिंग अधिकार बहाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 15 Jun 2026 01:26 PM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें विधायकों को नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान से रोका गया था। फैसले के बाद फिलहाल विधायकों के वोटिंग अधिकार बहाल हो गए हैं।

Supreme Court Stays Himachal High Court Order Restores MLAs Voting Rights in Urban Body Elections
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार को नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव से पहले बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हिमाचल हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें विधायकों को नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान करने से रोका गया था।



राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 4 जून के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि संबंधित कानून के तहत स्थानीय निकायों में पदेन सदस्य के रूप में विधायकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है और उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 जून को दिए अंतरिम आदेश में कहा था कि पदेन सदस्य यानी विधायक स्थानीय निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इन पदों का चुनाव केवल निर्वाचित पार्षद ही करेंगे। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सामान्य बैठकों और समितियों की बैठकों में विधायकों के अधिकार यथावत रहेंगे।
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हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। अब सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगाते हुए फिलहाल विधायकों के मतदान अधिकार बहाल कर दिए हैं। इससे नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।

उधर, इस मामले में पार्षदों की ओर से भी शीर्ष अदालत में केविएट याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब नगर निकाय चुनावों में विधायकों की भूमिका को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल समाप्त हो गई है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत विस्तृत कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।

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