वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़ा: 13.50 लाख में खरीदी क्रेटा पर 18.50 लाख का बैंक लोन, जांच में खुलासा
बिलासपुर के आरएलए सदर कार्यालय में वाहन पंजीकरण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में परत दर परत खुलासे हो रहे हैं।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के आरएलए सदर कार्यालय में वाहन पंजीकरण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में परत दर परत खुलासे हो रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच कमेटी की कार्रवाई के बाद जैसे ही बाहरी राज्यों की गाड़ियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए, वैसे ही कई चौंकाने वाले मामले सामने आने लगे हैं। एक ग्राहक को इस फर्जीवाड़े में दलाल के माध्यम से आरएलए की एनओसी दिखाकर ऐसी गाड़ी बेच दी गई, जिस पर जयपुर के एक बैंक में पहले से 18.50 लाख का लोन था। एसडीएम सदर की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने वर्ष 2025-26 के दौरान आरएलए बिलासपुर में पंजीकृत बाहरी राज्यों की गाड़ियों की जांच की।
सेकेंड हैंड गाड़ियां खरीदते लाखों रुपये खर्च किए
कई ऐसे मामले सामने आने लगे हैं, जिनमें लोगों ने सेकेंड हैंड गाड़ियां खरीदते समय दलालों और एजेंटों के झांसे में आकर लाखों रुपये खर्च कर दिए। आरोप है कि एक गिरोह आरएलए बिलासपुर से जारी एनओसी दिखाकर ग्राहकों को यह भरोसा दिलाता था कि गाड़ी के सभी कागजात सही हैं। लोगों ने आरएलए के दस्तावेजों और बिलासपुर नंबर पर भरोसा करते हुए वाहन खरीद लिए। लेकिन अब जब प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच शुरू की तो कई खरीदारों के पास जरूरी कागजात ही नहीं मिल रहे। इससे इस पूरे मामले में बड़े फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। इसी तरह का एक मामला सदर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। एक ग्राहक ने बताया कि उसने भगेड़ क्षेत्र में गाड़ियों के डीलर के माध्यम से क्रेटा कार खरीदी थी।
पीड़ित ने ये कहा
इस सौदे में मध्यस्थता करने वाला व्यक्ति बिलासपुर के दयोथ क्षेत्र का रहने वाला है और रसूखदार व्यक्ति का बेटा बताया जा रहा है। पीड़ित के अनुसार बाद में वही मध्यस्थ और हरियाणा के दो अन्य लोग गाड़ी लेकर उसके पास पहुंचे। उन्होंने गाड़ी दिखाई और साथ में आरएलए बिलासपुर में पंजीकृत होने के सभी दस्तावेज भी दिखाए। गाड़ी बिलासपुर नंबर की थी और आरएलए की एनओसी भी दिखाई गई थी। उन्होंने वाहन खरीदने का निर्णय ले लिया। उन्होंने इस गाड़ी के लिए कुल 13.50 लाख रुपये चुकाए। इसमें से 10 लाख रुपये फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर दिए गए, जबकि करीब साढ़े तीन लाख रुपये नकद दिए। यह पूरी राशि गाड़ियों के डीलर के खाते में जमा करवाई गई। जब आरएलए की ओर से उन्हें गाड़ी के दस्तावेज जमा करवाने के लिए पत्र मिला तो उन्होंने अपने पास उपलब्ध कागजात देखने शुरू किए।
गाड़ी को सेकंड हैंड बताकर पीड़ित को बेच दिया
इस दौरान उन्हें पता चला कि उनके पास कई जरूरी दस्तावेज ही नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति को फोन किया, जिसने इस डील में मध्यस्थता की थी, लेकिन उसने फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने हरियाणा के उन लोगों को भी फोन किया जो गाड़ी लेकर आए थे, लेकिन वे भी संपर्क में नहीं आए। बाद में उन्होंने गाड़ी के पहले मालिक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन भी बंद मिला। संदेह बढ़ने पर पीड़ित ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि गाड़ी के पहले मालिक ने जयपुर में एचडीएफसी बैंक से इस वाहन के लिए करीब साढ़े 18 लाख रुपये का लोन लिया था। बताया जा रहा है कि लोन लेने के बाद बैंक को केवल दो किस्तें ही चुकाई गईं और उसके बाद वाहन को कथित तौर पर फर्जी तरीके से आरएलए बिलासपुर में पंजीकृत करवा दिया गया। बाद में इस गाड़ी को सेकंड हैंड बताकर पीड़ित को बेच दिया गया।
हाइपोथिकेशन हटाकर दिखाई गई गाड़ी
आरोप है कि जब उन्हें गाड़ी बेची गई तो वाहन के दस्तावेजों में किसी भी बैंक की हाइपोथिकेशन (वाहन का दृष्टिबंधक) दर्ज नहीं थी। जबकि वास्तव में गाड़ी बैंक लोन के तहत गिरवी थी। यदि आरएलए में पंजीकरण के समय सही तरीके से जांच होती तो ऐसी गाड़ी को एनओसी जारी नहीं की जाती। पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को लिखित रूप में दी है। उनका कहना है कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इस पूरे मामले में दलालों के साथ आरएलए से जुड़े कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं। कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह इसे केवल पुलिस तक सीमित नहीं रखेंगे बल्कि राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसी तक भी ले जाएंगे।
दलाल के नंबर से जुड़ा पता
गाड़ी के पहले मालिक ने केयर ऑफ एड्रेस के लिए जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया था, वह भी उसी दलाल का निकला जिसने उन्हें गाड़ी दिखाने के लिए संपर्क किया था। इससे पूरे मामले में दलालों के नेटवर्क की भूमिका की आशंका और गहरी हो गई है। पीड़ित का कहना है कि वह अकेले नहीं हैं, बल्कि कई गाड़ियों के दस्तावेजों में इसी दलाल का मोबाइल नंबर रेफरेंस के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
2020 तक के पंजीकरण की भी होगी जांच
एसडीएम सदर डॉक्टर राजदीप सिंह ने कहा कि फिलहाल करीब 250 गाड़ियों की पहचान की गई है और उनके मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन गाड़ियों के मूल्य, एनओसी, ट्रांजेक्शन, परमिट और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि किसी भी वाहन के पंजीकरण में नियमों की अनदेखी या फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी के साथ कोई धोखाधड़ी हुई है तो वो कार्यालय में आकर उन्हें इसकी जानकारी दे सकते हैं।