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Himachal: जयराम ठाकुर बोले- मेडिकल कॉलेजों में दोगुना हो गया रोबोटिक सर्जरी का खर्च

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Mar 2026 06:50 PM IST
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सार

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की ओर से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चार महीने के अंदर ही रोबोटिक सर्जरी की फीस लगभग दोगुना कर दी गई है।

jairam Thakur said that the cost of robotic surgery has doubled in medical colleges.
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की ओर से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चार महीने के अंदर ही रोबोटिक सर्जरी की फीस लगभग दोगुना कर दी गई है। अटल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल चमियाना में जनरल वार्ड के मरीज की जो सर्जरी पहले 30 हजार रुपये में होती थी, उसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है। स्पेशल वार्ड के मरीजों से 80 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने मीडिया को बताया था कि रोबोटिक सर्जरी के लिए जनरल वार्ड के मरीजों से 30 हजार और स्पेशल वार्ड के मरीजों से 50 हजार लिए जाएंगे। जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसे में सवाल यह है कि एक ही शहर में स्थित सरकारी अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी के लिए दो तरह की फीस क्यों ली जा रही है। यह वित्तीय नियमों के भी अनुकूल नहीं है।

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नेता विपक्ष ने कहा कि तमाम दस्तावेजों के आधार पर यह बात सामने आई है कि हर रोबोटिक सर्जरी मशीन के साथ सरकार की ओर से लगभग 200 सर्जरी के लिए कंज्यूमेबल्स आइटम्स भी खरीदे गए थे। इसमें से ज्यादातर आइटम एक बार ही प्रयोग में ले जाते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि 200 सर्जरी के संसाधन प्रत्येक रोबोट के साथ हैं। उसके बाद रोबोटिक सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स खरीदने पड़ेंगे। डॉक्टरों के अनुसार प्रति सर्जरी ऐसे कंज्यूमेबल्स का ही खर्च एक लाख से डेढ़ लाख रुपये होगा।

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ऐसे में मुख्यमंत्री यह भी स्पष्ट करें कि आगे जब रोबोट के साथ आए सभी कंज्यूमेबल्स खत्म हो जाएंगे तब भी रोबोटिक सर्जरी के दाम वही रहेंगे। मुख्यमंत्री ने बहुत पहले ही यह बात स्पष्ट की थी कि रोबोटिक सर्जरी को हिम केयर के दायरे में होगी। 4 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन सरकार की ओर से ऐसा कोई शासकीय पत्र इस संबंध में जारी नहीं किया गया है। इसकी वजह से प्रदेश की 90 फीसदी आबादी जो कि हिम केयर अथवा आयुष्मान के दायरे में आती है उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। 

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