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Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी कल, जानिए शुभ मुहूर्त, शयन पूजन विधि और पारण का समय

Fri, 24 Jul 2026 05:56 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 24 Jul 2026 05:56 PM IST
सार

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में शयन करते हैं और देवउठनी एकादशी पर उठते हैं। 

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devshayani ekadashi 2026 date time shubh muhurat pujan vidhi paran timing mantra vishnu aarti
देवशयनी एकादशी व्रत पूजा महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Devshayani Ekadashi 2026: शनिवार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। देवशयनी एकादशी को आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाता है। आइए जानते हैं इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर बन रहे शुभ योग, मुहूर्त और, पूजा विधि और पारण समेत सभी जानकारियां। 
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देवशयनी एकादशी तिथि 2026 
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 13 मिनट से आरंभ होगी और इसका समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। 
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देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त में पूजा के लिए दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और संध्या पूजन मुहूर्त शाम 07 बजकर 17 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। 
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देवशयनी एकादशी पूजा विधि
सभी एकादशी में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी से लेकर कार्तिक माह की एकादशी तक भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में रहते हैं। ऐसे में इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने का खास महत्व होता है। देवशयनी एकादशी के दिन सूर्योदय होने से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।  भगवान विष्णु या श्रीलक्ष्मी-नारादयण की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। पंचामृत से भगवान विष्णु को स्नान करवाएं और गंगाजल से अभिषेक करने के बाद पीले वस्त्र अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाएं, तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और मौसमी फल अर्पित करें। इसके बाद भगवान को खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजन के अंत में भगवान के समक्ष एक स्वच्छ पीला या सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर छोटा तकिया या गद्दी प्रतीक रूप में रखें। भगवान से प्रार्थना करें कि वे चार माह के लिए योगनिद्रा में विराजमान हों और समस्त सृष्टि पर अपनी कृपा बनाए रखें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के जुड़े मंत्र, चालीसा और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। एकादशी के दूसरे दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह पूजा करें और व्रत का पारण करते हुए अपने सामर्थ्य से दान दें। 


संकल्प मंत्र
'सत्यस्थ: सत्यसंकल्प: सत्यवित् सत्यदस्तथा। धर्मो धर्मी च कर्मी च सर्वकर्मविवर्जित:।। कर्मकर्ता च कर्मैव क्रिया कार्यं तथैव च। श्रीपतिर्नृपति: श्रीमान् सर्वस्यपतिरूर्जित:।।'

शयन मंत्र
'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।'

विष्णु मंत्र
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवाय।
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।

क्षमा मंत्र
'भक्तस्तुतो भक्तपर: कीर्तिद: कीर्तिवर्धन:। कीर्तिर्दीप्ति: क्षमाकान्तिर्भक्तश्चैव दया परा।।'

भगवान विष्णु जी की आरती
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ 
ओम जय जगदीश हरे…

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ 
ओम जय जगदीश हरे…
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