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दशहरा 2026: 20 अक्टूबर को विजयादशमी, शमी पूजन से लेकर नीलकंठ दर्शन तक जानिए धार्मिक परंपराएं

Sun, 18 Oct 2026 04:18 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 18 Oct 2026 04:18 PM IST
सार

विजयदशमी का पर्व अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाने की परंपरा है। दशहरे पर कई तरह की मान्यताएं है जिसमें नीलकंठ पक्षी के दर्शन और शमी के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व होता है।

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dussehra 2026 vijayadashami 20 october shami pujan and neelkanth darshan importance and significance
विजयादशमी पूजन महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू धर्म में विजयादशमी अर्थात दशहरे का पर्व विजय, मंगल और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म की रक्षा की थी। यही कारण है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ नए कार्यों की शुरुआत और शुभ संकल्प लेने की परंपरा भी प्रचलित है।धार्मिक मान्यता के अनुसार,किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए विजयादशमी का दिन श्रेष्ठ माना गया है।इस दिन बिना मुहूर्त निकाले,कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार,इस दिन विभिन्न संस्कार युक्त कार्य जैसे बच्चे का नामकरण,अन्न प्राशन,मुंडन,कर्ण छेदन,यज्ञोपवीत,वेदारंभ,गृहप्रवेश,भूमि पूजन,नए व्यापार या दुकान का उद्घाटन नए वाहन या सामान की खरीद आदि कार्य बिना कोई शुभ मुहूर्त निकलवाए किए जा सकते हैं।

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दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है ?
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे। मान्यता है कि शमी पूजन से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और कार्यों में सफलता की प्रार्थना की जाती है। इस दिन शमी वृक्ष के पास जल अर्पित कर, रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
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दशहरे पर मां अपराजिता का पूजन क्यों ?
विजयादशमी पर मां अपराजिता की पूजा भी कई परंपराओं में की जाती है। अपराजिता का अर्थ है जिसे पराजित न किया जा सके। भक्त मां से अपने कार्यों में विजय, साहस और विघ्नों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। स्वच्छ स्थान पर पूजा की तैयारी करके दीपक, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अपनाई जा सकती है।
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दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ क्यों माना जाता है ?
दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को कई क्षेत्रों में शुभ शकुन माना जाता है।  इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी अति शुभ माना गया है।नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि माना गया है।रावण पर विजय पाने की अभिलाषा में श्री राम ने पहले नीलकंठ के दर्शन किए थे।विजयदशमी पर नीलकंठ के दर्शन और भगवान शिव से शुभफल की कामना करने से जीवन में भाग्योदय,धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

दशहरे पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?
इस दिन शस्त्र पूजा की परंपरा के साथ-साथ किसान अपने कृषि उपकरणों, कारीगर अपने औजारों और व्यापारी अपनी दुकान तथा बहीखातों का पूजन करते हैं। विद्यार्थी पुस्तकों और लेखन सामग्री के प्रति सम्मान प्रकट कर सकते हैं। वाहन और काम में आने वाले उपकरणों को स्वच्छ करके उन पर रोली-अक्षत लगाकर पुष्प अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा आजीविका के साधनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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