शुभ योग में गणेश चतुर्थी आज, जानिए गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन-विधि
आज गणेश चतुर्थी है और देशभर में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हुए उनका स्वागत किया जा रहा है। आइए जानते हैं गणपति की स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज देशभर में बड़े ही धूम-धाम के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। आज से ही 10 दिनों तक लगातार गणेश उत्सव की शुरुआत हो रही है, जिसमें घरों और पंडालों में भगवान गणपति की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है, इसलिए गणपति को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता देवता माना गया है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्त सुबह से गणपति का स्वागत करते हैं और उनको उनकी प्रिय चीजों को समर्पित करते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर कई तरह के राजयोग भी बना है। ऐसे में आइए जानते हैं भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश की पूजा और मूर्ति स्थापना का सबसे शुभ समय मध्याह्र काल का माना जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर यानि 14 सितंबर को सुबह 11 बजकर 02 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक पूजा और मूर्ति स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त में गणेश प्रतिमा की स्थापना करना शुभ और मंगलकारी रहेगा।
गणेश चतुर्थी पूजन विधि
आज के दिन यानी गणेश चतुर्थी पर सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहने, फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करते हुए चौकी पर लाल या फिर पीले रंग का कपड़ा बिछा लें। इसके बाद चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करके और पूजा का संकल्प लें। फिर गणपति जी की प्रतिमा के सामने धूप और दीपक जलाएं। इसके बाद, भगवान गणेश को गंगाजल, शुद्ध जल, पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, जनेऊ, लाल फूल, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेशजी मंत्रों का जाप करते हुए स्तुति करें और अंत में गणेश जी की आरती करें। फिर भगवान गणेशजी से आर्शीवाद मांगते हुए परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और जीवन में सफलता की कामना के लिए प्रार्थना करें।
गणपति को प्रसन्न करने के मंत्र
- मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
- ॐ लम्बोदराय नमः॥ या ॐ विघ्नेश्वराय नमः॥
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥