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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर अवश्य करें हनुमान चालीसा का पाठ, शीघ्र प्रसन्न होंगे बजरंगबली

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Megha Kumari Updated Thu, 02 Apr 2026 06:31 AM IST
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सार

Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान चालीसा का पाठ करने से प्रभु प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसके प्रभाव से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं। साथ ही भय और नकारात्मकता दूर होती है।

Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi know Hanuman Janmotsav 2026 shubh muhurat
Hanuman Janmotsav 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसका भक्त पूरे वर्ष बेसब्री से इंतजार करते हैं। मान्यता है कि, इसी दिन प्रभु हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए यह उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने का लाभकारी अवसर माना जाता है। शास्त्रों में भी हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि, उनकी सच्चे मन से की गई भक्ति साधक को बल, बुद्धि, विवेक और निर्भयता प्रदान करती हैं। हालांकि, इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस वर्ष 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन कई शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में इस पावन अवसर पर श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी सिद्ध हो सकता है। आइए इस शक्तिशाली चालीसा को जानते हैं।

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हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।



 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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