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Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या कल, जानिए इस तिथि पर स्नान-दान और पितरों की पूजा का महत्व
Tue, 11 Aug 2026 06:41 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 11 Aug 2026 06:41 PM IST
सार
Hariyali Amavasya 2026: सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस पर्व पौधे लगाने का विशेष महत्व होता है।
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सावन 2026 हरियाली अमावस्या
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Hariyali Amavasya 2026: बुधवार, 12 अगस्त को सावन अमावस्या है, जिसे हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों को तर्पण देने की परंपरा है। साथ ही इस दिन पेड़-पौधों को लगाने का भी विधान होता है। 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा जो रात 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू हो जाएगा। सावन माह में पड़ने वाली इस अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्तवी की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से ग्रह दोषों से छुटकारा मिलता है और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस हरियाली अमावस्या की तिथि, स्नान-दान का मुहूर्त, धार्मिक महत्व।
हरियाली अमावस्या 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को सुबह 01 बजकर 53 मिनट से आरंभ होगी जो रात 11 बजकर 7 मिनट तक चलेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी।
हरियाली अमावस्या पर शुभ योग
इस बार हरियाली अमावस्या पर पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यातिपात और वरीयान योग का निर्माण हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ बुधादित्य, गजकेसरी, शशि आदित्य समेत चतुर्ग्रही योग का भी बन रहा है।
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हरियाली अमावस्या पर पेड़-पौधे लगाने का महत्व
हरियाली अमावस्या पर पेड़ लगाने का विशेष महत्व होता है। इस दिन तुलसी, नीम, पीपल, बरगद, बेलपत्र, मनी प्लांट जैसे पौधे को लगना शुभ और पवित्र माना जाता है।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष विधान होता है। इससे शिवजी की विशेष कृपा मिलती है। साथ ही इस दिन पितरों को तर्पण देना बहुत ही लाभकारी और शुभ माना जाता है। इस दिन पौधा लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही दान-पुण्य करना भी खास होता है।
हरियाली अमावस्या 2026 पर स्नान और दान का मुहूर्त
अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त, अमृत काल और लाभ-उन्नति में स्नान करना बहुत ही शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। 12 अगस्त को ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 29 मिनट से लेकर 05 जबकर 17 मिनट तक रहेगा वहीं अमृतकाल का मुहूर्त सुबह 04 बजकर 36 मिनट से लेकर 06 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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हरियाली अमावस्या 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को सुबह 01 बजकर 53 मिनट से आरंभ होगी जो रात 11 बजकर 7 मिनट तक चलेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी।
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हरियाली अमावस्या पर शुभ योग
इस बार हरियाली अमावस्या पर पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यातिपात और वरीयान योग का निर्माण हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ बुधादित्य, गजकेसरी, शशि आदित्य समेत चतुर्ग्रही योग का भी बन रहा है।
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हरियाली अमावस्या पर पेड़-पौधे लगाने का महत्व
हरियाली अमावस्या पर पेड़ लगाने का विशेष महत्व होता है। इस दिन तुलसी, नीम, पीपल, बरगद, बेलपत्र, मनी प्लांट जैसे पौधे को लगना शुभ और पवित्र माना जाता है।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष विधान होता है। इससे शिवजी की विशेष कृपा मिलती है। साथ ही इस दिन पितरों को तर्पण देना बहुत ही लाभकारी और शुभ माना जाता है। इस दिन पौधा लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही दान-पुण्य करना भी खास होता है।
हरियाली अमावस्या 2026 पर स्नान और दान का मुहूर्त
अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त, अमृत काल और लाभ-उन्नति में स्नान करना बहुत ही शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। 12 अगस्त को ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 29 मिनट से लेकर 05 जबकर 17 मिनट तक रहेगा वहीं अमृतकाल का मुहूर्त सुबह 04 बजकर 36 मिनट से लेकर 06 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।