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Vat Purnima 2026: कब है वट पूर्णिमा व्रत, जानिए धार्मिक महत्व और पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

Fri, 26 Jun 2026 01:39 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 26 Jun 2026 01:39 PM IST
सार

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्यवती और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए कामना करती है। वट पूर्णिमा पर सावित्री-सत्यवान कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। 

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vat purnima 2026 kab hai vat purnima vrat importance and puja vidhi yog
Vat Purnima Vrat 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Vat Purnima 2026: सोमवार, 29 जून को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि वट पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। वट पूर्णिमा की तिथि पर सुहागिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा और आराधना करती हैं। यह व्रत उत्तर भारत की अपेक्षा महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में ज्यादा मनाया जाता है। उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या ज्यादा मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की विधिवत पूजा अर्चना और परिक्रमा करते हुए अपने सुहाग की अखंड सौभाग्यवती का कामना करती हैं। आइए जानते हैं वट पूर्णिमा की तिथि और धार्मिक महत्व। 
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वट पूर्णिमा तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 03 बजकर 06 मिनट पर शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 30 जून को सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ वट पूर्णिमा पर पूजा और स्नान के लिए ब्रह्राा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 06 मिनट से लेकर 04 बजकर 46 मिनट तक चलेगा। वहीं इस दिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना शुभ रहेगा। 
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वट पूर्णिमा व्रत शुभ योग और पूजा शुभ मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वट पूर्णिमा पर दो शुभ योगों का निर्माण हुआ है। वट पूर्णिमा पर पहला शुभ योग सुबह से शुरू होकर दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरा शुभ योग ब्रह्रा है जो पहले योग के खत्म होने के बाद दूसरा शुरू हो जाएगा। शुभ योग में पूजा करना बहुत ही शुभ साबित हो सकता है।
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वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म मे वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने का महत्व होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं, सूत बांधती हैं और मिलकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं, जिससे दांपत्य जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, साथ ही पति-पत्नी के बीच रिश्तों में मजबूती आती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो सुहागिन महिलाएं पूर्णिमा व्रत पर अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा करती है उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

वट वृक्ष पूजा के लाभ
हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा के लिए विशेष विधान बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, अगर शुभ-शाम और विशेष तिथियों पर वट वृक्ष की पूजा की जाए तो दांपत्य जीवन में सुख और शांति आती है। वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा वट पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति वृक्ष का रोपण करता है उसको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वट वृक्ष की परिक्रमा करने और इसके चारों तरफ कलावा बांधने से पति की लंबी आयु और संतान सुख की प्राप्ति करता है। 

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 डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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