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Nirjala Ekadashi 2026 Live: 24 एकादशियों का फल देने वाला निर्जला व्रत आज, जानें मुहूर्त, उपाय और दान का महत्व

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 25 Jun 2026 10:51 AM IST
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खास बातें

Nirjala Ekadashi 2026 Live Ekadashi Vrat Katha Updates in Hindi: निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसा व्रत है, जिसे धर्म शास्त्रों में सबसे अधिक पुण्यदायी माना गया है। इसे पांडव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। निर्जला एकादशी ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इस पावन दिन कर्क राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। इस लाइव ब्लॉग में जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन से जुड़े हर अपडेट से।

Nirjala Ekadashi 2026 Live Ekadashi Puja Vidhi Parana Time Daan Upay and Vrat Katha in Hindi
Nirjala Ekadashi 2026 Live - फोटो : amar ujala
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लाइव अपडेट

11:16 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत कथा - फोटो : AI
धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी माता कुंती और उनके चारों भाई नियमित रूप से व्रत, स्नान और दान करते हैं, लेकिन वे स्वयं उपवास नहीं कर पाते। उन्हें चिंता थी कि बिना व्रत किए उन्हें मोक्ष कैसे प्राप्त होगा। भीमसेन ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि उन्हें अत्यधिक भूख लगती है, इसलिए वे उपवास रखने में असमर्थ हैं।

इस पर वेदव्यास जी ने उन्हें समझाया कि यदि वे स्वर्ग और नरक का अंतर जानते हैं, तो उन्हें प्रत्येक माह आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत करना चाहिए। उस दिन अन्न का सेवन न करना ही व्रत का नियम है। लेकिन भीमसेन ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए बिना भोजन के रहना संभव नहीं है, क्योंकि उनके पेट में ‘वृक’ नाम की अग्नि है, जो भोजन से ही शांत होती है।

तब उन्होंने विनम्रता से निवेदन किया कि उन्हें ऐसा कोई एक व्रत बताया जाए, जिसे साल में केवल एक बार करके सभी पापों से मुक्ति मिल सके और मोक्ष की प्राप्ति हो। इस पर वेदव्यास जी ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे निर्जला एकादशी कहा जाता है, ऐसा ही व्रत है। इस दिन न अन्न ग्रहण करना होता है और न ही जल। यदि गलती से भी जल पी लिया जाए, तो व्रत का फल नहीं मिलता।


इस व्रत का पालन सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान, दान-पुण्य करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। जो व्यक्ति इस व्रत को विधि-विधान से करता है, उसे वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यह सुनकर भीमसेन प्रसन्न हुए और उन्होंने निर्जला एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया। भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद द्वादशी के दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें श्रीहरि की कृपा प्राप्त हुई, उनके सभी पाप नष्ट हो गए और अंततः उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई।
 
10:49 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026: पढ़ें विष्णु जी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥


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10:40 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आयु और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा यह व्रत कई जन्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करने में भी सहायक माना जाता है। इसी वजह से इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करने की सलाह दी जाती है।

10:26 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: व्रत न रख पाएं तो अपनाएं ये सरल तरीका

यदि किसी कारणवश आप निर्जला एकादशी का कठिन व्रत यानी पूरी तरह जल त्याग करके व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में आप फलाहारी व्रत का विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें दिन भर फल, जूस और दूध जैसी चीजें ली जा सकती हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान सिर्फ भक्त की सच्ची श्रद्धा और भावना देखते हैं, न कि व्रत की कठोरता को। इसलिए अपनी सेहत को जोखिम में डालकर निर्जल व्रत करना बिल्कुल आवश्यक नहीं है।
10:15 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए 'निर्जला' व्रत?

धार्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से कुछ लोगों को निर्जला एकादशी का कठोर निर्जल व्रत नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को यह व्रत करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी निर्जल उपवास उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे उनके और शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, मधुमेह, ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी यह व्रत नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें समय पर दवा और भोजन की आवश्यकता होती है।
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10:03 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये अचूक उपाय

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और पीले फल अर्पित करना शुभ माना जाता है और बाद में इन्हें दान कर देना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए, साथ ही ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते न तोड़ें। मुख्य द्वार और घर के ईशान कोण में भी घी का दीपक जलाना चाहिए, जिसमें हल्दी या केसर मिलाना शुभ होता है। यदि कोई व्यक्ति निर्जला व्रत नहीं रख पाता है, तो वह विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकता है। इसके अलावा, इस दिन प्याऊ में पानी की व्यवस्था करना या मटका, शक्कर और खरबूजा दान करना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
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09:31 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्पित करें ये फूल

 

  • निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • पीले फूल भगवान विष्णु को विशेष प्रिय माने जाते हैं।
  • पूजा में पीला कमल, गेंदा, चंपा, चमेली, गुलाब और पारिजात (हरसिंगार) अर्पित किए जा सकते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष और अनिवार्य महत्व होता है।

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09:20 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी व्रत नियम 

  • निर्जला एकादशी व्रत में अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखा जाता है।
  • एकादशी तिथि शुरू होने के बाद कुछ भी खाने-पीने से बचना चाहिए।
  • व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर विधि-विधान से करना चाहिए।
  • पारण के समय केवल सात्विक भोजन का सेवन करें।
  • द्वादशी के दिन लहसुन, प्याज, मसूर दाल, मांस और मदिरा का सेवन न करें।
  • व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
  • किसी से विवाद, क्रोध या नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
09:04 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: राशि अनुसार करें दान 

  • मेष: सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज)
  • वृषभ: पानी से भरा घड़ा
  • मिथुन: मौसमी फल
  • कर्क: दूध या मिश्री
  • सिंह: तांबे का पात्र या धार्मिक पुस्तकें
  • कन्या: जल से भरा घड़ा और हाथ का पंखा
  • तुला: पीले वस्त्र या अन्न
  • वृश्चिक: सत्तू या गुड़
  • धनु: चने की दाल और पीले फल
  • मकर: उड़द की दाल या छाता
  • कुंभ: पीने का पानी या शरबत
  • मीन: पीले अनाज या केले
08:50 AM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi 2026 Live: निर्जला एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने के नियम

सनातन परंपराओं में निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है और तुलसी माता को भी विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी कारण पूजा में चढ़ाने के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही एकत्र कर लेने की परंपरा प्रचलित है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है और इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है। यदि किसी कारणवश एकादशी के दिन तुलसी दल लेना आवश्यक हो जाए, तो पहले तुलसी माता को प्रणाम कर उनसे क्षमा प्रार्थना करने की मान्यता है। मान्यता है कि नियमों का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक की गई विष्णु और तुलसी पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

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