पांचवा वेद माना जाने वाले महाभारत में कई प्रमुख स्थानों का वर्णन मिलता है। इनमें कई स्थान कहां और किस रूप में हैं, इसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। महाभारत से जुड़े 10 प्राचीन स्थल का महत्व और उनकी मौजूदा लोकेशन जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
महाभारत युद्ध के गवाह हैं ये 10 स्थान, जानें कहां और किस हाल में हैं?
1. हस्तिनापुर
महाभारत से जुड़े 10 प्रमुख स्थानों में सबसे पहले बात करते हैं कुरु वंश के राजाओं की राजधानी हस्तिनापुर की। वर्तमान समय में यह स्थान मेरठ शहर के पास है। यह शहर देश की राजधानी दिल्ली से तकरीबन 90 किमी दूर उत्तर पूर्व में गंगा किनारे है। कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम् का नायक दुष्यंत यहीं का शासक था।
2. तक्षशिला
महाभारत काल में तक्षशिला गंधार प्रदेश राजधानी थी। कौरवों की माता कुंती गंधार के राजा शुबल की पुत्री थीं। मान्यता है कि इसी स्थान पर पांडवों के वंशज जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की सांप काटने से मृत्यु के बाद क्रोधित होकर सर्पयज्ञ का अयोजन किया था, जिसमें हजारों नाग जलकर भष्म हो गए थे।तक्षशिला आचार्य चाणक्य और पाणिनी की कर्म भी रही है। तक्षशिला को विश्व का ‘प्रथम विश्वविद्यालय’ माना जाता है। एक समय यहां पर दुनिया के कोने-काने से लोग पढ़ने आया करते थे।
3. उज्जानिक
महाभारत काल से संबंध रखने वाला उज्जानिक नामक स्थान मौजूदा समय में उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में है। मान्यता है कि उज्जानिक में ही गुरु द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को शिक्षा दी थी। इस स्थान पर मौजूद द्रोणसागर झील के बारे में मान्यता है कि पांडवों ने गुरु दक्षिणा के तौर पर इस झील का निर्माण किया था।
4. लाक्षागृह
महाभारत काल में दुर्योधन द्वारा बनवाया गया लाक्षागृह मौजूदा समय स्थान बागपत में स्थित है। 'वारणावत' नाम का यह स्थान उन गांवों में से एक है, जिसकी मांग पांडव कौरवों से कर रहे थे। लेकिन दुर्योधन ने उन्हें सुई की नोक के बराबर जमीन नहीं देने की बात कही थी। दुर्योधन ने एक साजिश के तहत इस लाक्षागृह को लाख से बनवाया था, ताकि पांडव जब इस घर में रहने आएं तो चुपके से इसमें आग लगा कर उन्हें खत्म किया जा सके। लेकिन दुर्योधन की यह साजिश नहीं सफल हुई और पांडवों इस भवन से सकुशल बच निकले थे।

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