विजयादशमी 2018 : राम की लीला से जुड़ी 10 बातें जो आप नहीं जानते
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तुलसीदास जी ने प्रारंभ की रामलीला!
मान्यता है कि रामचरित मानस के प्रचार-प्रसार के लिए तुलसीदास ने रामलीला की शुरूआत की थी। हालांकि तुलसी की रामलीला के पहले भी रामकथा के गायन और उनके चरित्र के नाट्य स्वरूप का जिक्र मिलता है। जैसा कि बाल्मीकि रामायण में लवकुश रामकथा का गायन करते हैं। इसी तरह महाभारत में तथा हरिवंश पुराण में भी राम के चरित्र को लेकर नाटक का उल्लेख मिलता है।
क्या होती है लीला
लीला शब्द न सिर्फ राम बल्कि कृष्ण के साथ भी जुड़ा हुआ है। सही मायने में ईश्वर के अवातार से जुड़ी ‘लीला’ भारतीय भक्तों की अनूठी परिकल्पना है। जिसमें सिर्फ और सिर्फ आनंद है। पुराणों ने लीला में देवत्व को भी मानत्व में रूपांतरित किया है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को देखकर इसे सहज ही जाना जा सकता है।
कितने प्रकार की होती है लीला
लीला का अर्थ होता है लीन होना। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो लीला तीन प्रकार की होती है।
नित्य लीला — यह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में दिन-प्रतिदिन घट रही है।
अवतार लीला – इसमें ईश्वर स्वयं मानव मात्र के कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतार लेते हैं।
अनुकरण लीला – इस लीला के जरि मनुष्य ईश्वर के अवतार का अनुकरण करने का प्रयास करता है। फिर चाहे वह रामलीला हो या रास लीला।
लीला देखने का लाभ
पौराणिक मान्यता के अनुसार ईश्वर की लीला का अनुकरण करने या उसे देखने मात्र से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है। लीला की पवित्रता को कायम रखने के लिए इसके पात्रों को भी इसी भक्ति भावना के साथ अपनी भूमिका अदा करनी पड़ती है।