Devshayani Ekadashi 2026: कब और कैसे करें देवशयनी एकादशी व्रत का पारण, जानिए विधि और समय
देवशयनी एकादशी पर पारण का समय 26 जुलाई होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक पारण करना बहुत ही शुभ और फलदायी रहेगा।
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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में कुल 24 एकादशी आती है और हर एक एकादशी का अपना-अपना महत्व होता है। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा में क्षीर सागर में चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। जिसमें चार महीने तक सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान जागते हैं सभी तरह के शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा करने का महत्व होता है। इस तिथि पर लोग व्रत रखते हुए पूजा, जप और तप करते हैं। एकादशी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब द्वादशी तिथि पर विधि-विधान के साथ पारण करते हैं। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी पर किस समय पारण करना शुभ रहेगा और क्या रहेगा पूजा विधि।
देवशयनी एकादशी पारण का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर पारण का समय 26 जुलाई होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सुबह 5 बजकर 40 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक पारण करना बहुत ही शुभ और फलदायी रहेगा।
देवशयनी एकादशी व्रत पारण विधि
देवशयनी एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के दौरान पारण करें। इस बार द्वादशी तिथि प्रातः 5:40 बजे से सुबह 8:20 बजे तक रहेगी। इस समय के भीतर विधि-विधान से व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।
-प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ एवं पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
-पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान कर व्रत पारण का संकल्प लें।
-भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, अक्षत और शुद्ध जल अर्पित करें।
-इसके बाद फल, दूध, मिष्ठान्न तथा तुलसी दल अर्पित कर भगवान को भोग लगाएं।
-तुलसी की माला से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।
-पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम और कनकधारा स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
-इसके पश्चात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत आरती कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
-व्रत या पूजा में यदि किसी प्रकार की त्रुटि हुई हो तो भगवान से क्षमा याचना करते हुए व्रत स्वीकार करने की प्रार्थना करें।
-पारण के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, जल, वस्त्र, शक्कर, पंखा, छाता और दक्षिणा आदि का दान करें।
-धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जल से भरा कलश दान करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है और इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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