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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Mangla Gauri Vrat 2026 Know the Dates and Religious Significance of the Sawan Tuesday Fast

Mangla Gauri Vrat 2026: कब हैं सावन के मंगला गौरी व्रत? जानें व्रत की तिथियां और महत्व

Sun, 26 Jul 2026 01:26 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 26 Jul 2026 01:26 PM IST
सार

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन में सोमवार के साथ मंगलवार का भी विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन मां पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में मंगला गौरी व्रत की तिथियां और इसका धार्मिक महत्व।

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Mangla Gauri Vrat 2026 Know the Dates and Religious Significance of the Sawan Tuesday Fast
मंगला गौरी व्रत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। जहां सावन के सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष महत्व रखते हैं, वहीं सावन के मंगलवार मां गौरी को समर्पित होते हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति की कामना से मंगला गौरी व्रत करती हैं। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में सावन के मंगला गौरी व्रत कब-कब पड़ेंगे और इनका धार्मिक महत्व क्या है।

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Mangla Gauri Vrat 2026 Know the Dates and Religious Significance of the Sawan Tuesday Fast
गला गौरी व्रत की तिथियां - फोटो : Adobe stock

सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तिथियां

  • पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026, मंगलवार
  • दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
  • तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026, मंगलवार
  • चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026, मंगलवार

वर्ष 2026 में सावन मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान चार मंगलवार पड़ेंगे और इन सभी दिनों में मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।

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मंगला गौरी व्रत का महत्व - फोटो : Adobe stock

मंगला गौरी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगला गौरी व्रत मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की इच्छा से इस व्रत का पालन करती हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने तथा मां गौरी को सुहाग की सामग्री, श्रृंगार का सामान, लाल पुष्प और फल अर्पित करने से मंगल दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख, सौहार्द और समृद्धि का वास होता है।

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मंगला गौरी व्रत पूजा विधि - फोटो : adobe stock

मंगला गौरी व्रत पूजा विधि

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या लाल/पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थान या मंदिर की अच्छी तरह सफाई करके एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  • चौकी पर मां गौरी (माता पार्वती) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव का भी पूजन करें।
  • मां गौरी को लाल चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, लाल पुष्प, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कंघी आदि) अर्पित करें।
  • घी का दीपक और धूप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
  • "ॐ गौर्यै नमः" या "ॐ पार्वत्यै नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें और माता से अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
  • अंत में मां गौरी और भगवान शिव की आरती करें तथा प्रसाद वितरित करें।
  • व्रत का पारण अगले दिन प्रातः या स्थानीय परंपरा एवं पारिवारिक रीति के अनुसार करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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