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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Importance Of Worship the Peepal tree relieves the pain of Saturn know significance

पीपल की पूजा से दूर होती है शनि पीड़ा, पुराणों में बताया गया विशेष महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Sun, 08 Mar 2026 03:21 PM IST
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सार

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। 

Importance Of Worship the Peepal tree relieves the pain of Saturn know significance
पीपल के वृक्ष का महत्व - फोटो : freepik
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विस्तार

हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। विशेष रूप से शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने का बहुत महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित कर दीपक जलाने और उसकी परिक्रमा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि ज्योतिष और धर्मग्रंथों में पीपल की पूजा को शनि दोष और जीवन की बाधाओं को दूर करने का सरल और प्रभावी उपाय माना गया है। 
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पद्मपुराण में पीपल का महत्व
पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। इसी कारण इसे धार्मिक क्षेत्र में “देव वृक्ष” की पदवी प्राप्त हुई है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से पीपल के वृक्ष को प्रणाम करता है और उसकी परिक्रमा करता है, उसकी आयु में वृद्धि होती है। साथ ही जो भक्त पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति का फल मिलता है।
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त्रिदेव का निवास माना गया है
पीपल धार्मिक ग्रंथों में पीपल को ऐसा पवित्र वृक्ष बताया गया है जिसमें त्रिदेव का वास होता है। मान्यता है कि इसकी जड़ में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव और अग्रभाग में ब्रह्मा जी का निवास होता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है “अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम”,अर्थात सभी वृक्षों में मैं पीपल हूं। इस कथन से पीपल के वृक्ष की दिव्यता और महत्व स्पष्ट हो जाता है। इसी कारण इसे ब्राह्मण, गौ और देवताओं की तरह पूजनीय माना गया है।

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पितरों और तीर्थों का वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष में पितरों का निवास भी माना गया है। इसलिए कई धार्मिक संस्कार, जैसे मुंडन आदि, पीपल के नीचे करवाने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इस वृक्ष में अनेक तीर्थों का भी वास होता है। इसके नीचे यज्ञ, हवन, पूजा-पाठ और पुराण कथा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके पत्तों से बनी वंदनवार को भी शुभ अवसरों पर घर के द्वार पर लगाया जाता है, जो मंगल का प्रतीक मानी जाती है।

शनि की कृपा के लिए पीपल की पूजा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीपल का संबंध शनिदेव से माना गया है। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाने, सरसों के तेल का दीपक जलाने और उसकी परिक्रमा करने से शनि से जुड़े कष्ट कम होते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो, उनके लिए पीपल की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। 

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