सावन में मंगला गौरी व्रत की महिमा: शिव-शक्ति की कृपा, मंगल दोष मुक्ति और अखंड सौभाग्य का महाउत्सव
सावन में रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता गौरी को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत और पूजा से शिव-शक्ति की कृपा प्राप्त होती है, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है।
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Mangala Gauri Vrat: सनातन परंपरा में सावन का महीना जितना शिव-भक्ति के लिए पावन है, उतना ही यह आद्यशक्ति मां पार्वती (गौरी) के अनुग्रह को प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ समय है। जहाँ सावन के सोमवार देवों के देव महादेव को समर्पित हैं, वहीं प्रत्येक मंगलवार मां पार्वती के 'मंगला गौरी' स्वरूप की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। चलिए जानते हैं विस्तार से।
सावन में क्यों रखा जाता है मंगला गौरी व्रत?
तपस्या का दिव्य स्मरण: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में ही देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। माँ गौरी की इसी अनन्य भक्ति और समर्पण को आदर देने के लिए सावन के मंगलवार को यह व्रत रखा जाता है। शिव-शक्ति का पूर्ण मिलन: सोमवार को शिव-पूजन के बाद मंगलवार को गौरी-पूजन करने से घर में प्रकृति और पुरुष (शिव और शक्ति) का संतुलन बनता है, जिससे गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। हनुमान जी और मंगल देव का अद्भुत संबंध: मंगलवार का दिन होने के कारण माँ गौरी के साथ-साथ इस दिन श्री हनुमान जी और मंगल देव की पूजा भी स्वतः फलित होती है। बजरंगबली के चरणों का सिंदूर माथे पर लगाने से तीव्र से तीव्र मंगल दोष शांत होता है।
'16' की संख्या का दिव्य रहस्य
16 की संख्या: मंगला गौरी पूजा में हर सामग्री 16 की संख्या (जैसे 16 लौंग, 16 सुपारियाँ, 16 चूड़ियाँ, 16 मालाएँ आदि) में चढ़ाई जाती है। माना जाता है कि 16 की संख्या माँ पार्वती के 16 कलाओं और संपूर्ण 16 श्रृंगार का प्रतीक है। आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक: इस व्रत में सामान्य दीये के बजाय गेहूँ के आटे से बने 16 बत्तियों वाले घी के दीपक का उपयोग होता है, जो घर से 16 प्रकार के वास्तु एवं ग्रह दोषों को समाप्त करने का सामर्थ्य रखता है।
मंगला गौरी व्रत के प्रमुख आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक लाभ
- अखंड सौभाग्य एवं दांपत्य सुख: यह व्रत सुहागिन महिलाओं के जीवन से असमय वियोग, तनाव और गृहक्लेश को समाप्त कर पति की दीर्घायु सुनिश्चित करता है।
- मनचाहा जीवनसाथी व शीघ्र विवाह: जिन अविवाहित कन्याओं के विवाह में बार-बार बाधाएँ आ रही हों, उन्हें इस व्रत के प्रभाव से सर्वगुण संपन्न जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- संतान सुख एवं कुल वृद्धि: यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण करता है, बल्कि संतान के आरोग्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी देता है।
- कड़े मंगल दोष से राहत: कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव का मंगल दोष इस व्रत के प्रभाव से शांत होता है।
मंगला गौरी पूजन की प्रामाणिक एवं सुगम विधि
- संकल्प व स्थापना: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
- लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ मंगला गौरी और भगवान शिव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
- पास ही जल से भरा कलश रखें।
- संकल्प मंत्र: हाथ में जल और अक्षत लेकर मंत्र से व्रत का संकल्प लें: "मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।"
- षोडशोपचार पूजन व अर्पण: माँ के समक्ष 16 बत्तियों वाला आटे का दीपक प्रज्वलित करें।
- सर्वप्रथम श्रीगणेश और कलश का पूजन करें।
- इसके बाद माँ गौरी को गंगाजल से स्नान कराकर 16 की संख्या में सुहाग सामग्री, फल, फूल, मेवे, अनाज और 16 मालाएँ अर्पित करें।
- मंगला गौरी की पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
- धूप-दीप से माँ की आरती उतारें और पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।
- इसके बाद किसी वरिष्ठ सुहागिन महिला के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
उद्यापन का नियम
16 मंगला गौरी व्रत पूर्ण होने पर विधि-विधान से हवन और पूजन करवाकर उद्यापन करना चाहिए, तभी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
भाग्य संवारने वाले 3 अचूक उपाय
16 श्रृंगार एवं 'ॐ गौरीशंकराय नमः' मंत्र जाप
मां गौरी को 16 श्रृंगार अर्पित करें और "ॐ गौरीशंकराय नमः" मंत्र का कम से कम 21 या 108 बार जाप करें। इससे विवाह में आ रही देरी समाप्त होती है।
कन्या पूजन एवं सुहाग उपहार
व्रत के दिन 5 या 7 छोटी कन्याओं को घर बुलाकर आदरपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें चूड़ी, बिंदी व फल भेंट करें। ऐसा करने से माँ अन्नपूर्णा और माँ गौरी का स्थाई वास घर में होता है।
मंगल शांति हेतु बीज मंत्र व लाल वस्तुओं का दान
मंगल देव की प्रसन्नता के लिए "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" या "ॐ अं अंगारकाय नमः" मंत्र का जाप करें। साथ ही लाल मसूर, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान करें। इससे कोर्ट-कचहरी, कर्ज और भूमि संबंधी विवादों का निवारण होता है।