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वैशाख माह: जप-तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना से पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ समय
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Sat, 04 Apr 2026 12:12 PM IST
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सार
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख का महीना भगवान विष्णु की पूजा, आराधना और जाप का विशेष महत्व होता है। वैशाख का महीना 03 अप्रैल से शुरू होकर 01 मई तक चलेगा।
वैशाख मास सब प्राणियों की मनोकामना को सिद्ध करता है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार सृष्टि के आरंभ के पंद्रह दिन बाद वैशाख मास का आरम्भ होता है। यह पवित्र मास व्यक्ति को व्यष्टि से समष्टि की ओर उन्मुख होने की प्रेरणा देता है। पुराणों में इस मास को जप, तप और दान का महीना कहा गया है। वैशाख मास के प्रारम्भ होते ही तपिश का वातावरण बनता है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस माह में वरुण देवता का विशेष महत्त्व माना गया है।
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वैशाख की महिमा
स्कंद पुराण के अनुसार वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया है। जैसे सतयुग के समान कोई दूसरा युग नहीं, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं, गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, उसी प्रकार वैशाख मास के समान कोई महीना नहीं है। यह मास माता के समान सभी जीवों को अभीष्ट फल प्रदान करने वाला बताया गया है। संपूर्ण देवताओं द्वारा पूजित धर्म, यज्ञ, क्रिया और तपस्या का सार इसी मास में निहित है।
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श्रेष्ठता का आधार
जैसे विद्याओं में वेद विद्या, मंत्रों में प्रणव, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, प्रिय वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगाजी, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शास्त्रों में चक्र, धातुओं में सुवर्ण, वैष्णवों में शिव तथा रत्नों में कौस्तुभमणि श्रेष्ठ माने गए हैं, उसी प्रकार धर्म के साधन स्वरूप महीनों में वैशाख मास सर्वोत्तम है।
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विष्णुजी का प्रिय मास
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस महीने में सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। पुराणों के अनुसार वैशाख मास में भगवान विष्णु की आज्ञा से जनकल्याण हेतु जल में समस्त देवी-देवताओं का निवास होता है, जिससे इस मास का स्नान और अधिक पुण्यदायी बन जाता है।
अंबरीश-नारद संवाद
एक प्रसंग के अनुसार जब राजा अंबरीश दीर्घकाल तक तपस्या करने के बाद गंगा तीर्थ की ओर जा रहे थे, तब मार्ग में उन्हें देवर्षि नारद जी के दर्शन हुए। राजा ने विनम्रतापूर्वक पूछा— “देवर्षि! ईश्वर ने प्रत्येक वस्तु में किसी न किसी को श्रेष्ठ बनाया है, तो मासों में कौन-सा मास सर्वश्रेष्ठ है?” इस पर नारद जी ने उत्तर दिया- “समय विभाजन के समय ब्रह्मा जी ने वैशाख मास को अत्यंत पवित्र सिद्ध किया है। यह मास सभी प्राणियों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है तथा धर्म, यज्ञ और क्रियाओं का सार है। यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।”
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दान की महत्ता
वैशाख मास को दान का मास कहा गया है। इस माह में शिवलिंग पर जल चढ़ाना या गलंतिका बंधन (मटकी लटकाना) विशेष पुण्यदायक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस माह में प्याऊ लगाना, छायादार वृक्षों की रक्षा करना, पशु-पक्षियों के लिए आहार की व्यवस्था करना तथा राहगीरों को जल पिलाना अत्यंत पुण्यकारी कार्य हैं। कहा गया है कि अनेकों तीर्थों के बराबर फल केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त हो जाता है।
दान के फल
इस माह में छाया चाहने वालों को छाता दान करना और शीतलता की इच्छा रखने वालों को पंखा दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो व्यक्ति वैशाख मास में पादुका (जूते-चप्पल) का दान करता है, वह यमदूतों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त होता है।
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स्नान और आचरण
वैशाख मास के देवता भगवान मधुसूदन माने गए हैं। इस मास में स्नान करने वाले साधक को संकल्प लेना चाहिए।
“हे मधुसूदन! हे देवेश्वर माधव! मैं मेष राशि में सूर्य के स्थित होने पर वैशाख मास में प्रातः स्नान करूँगा, कृपया इसे निर्विघ्न पूर्ण कराइए।”
यह महीना संयम, अहिंसा, आध्यात्म, स्वाध्याय और जनसेवा का प्रतीक है। इस दौरान धूम्रपान, मांसाहार, मदिरापान और परनिंदा जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहना चाहिए। भगवान विष्णु की सेवा तथा उनके सगुण या निर्गुण स्वरूप का एकाग्र चित्त से ध्यान करना इस मास की विशेष साधना मानी गई है।
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