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'खेल के साथ पढ़ाई भी जरूरी': पीवी सिंधू की युवा खिलाड़ियों को सलाह, कहा- आप पूरी जिंदगी खेलते नहीं रह सकते
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
Published by: Swapnil Shashank
Updated Wed, 18 Mar 2026 03:44 PM IST
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सार
पीवी सिंधू ने कहा कि खेल के साथ शिक्षा बेहद जरूरी है क्योंकि स्पोर्ट्स करियर छोटा और जोखिम भरा होता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को सलाह दी कि पढ़ाई को नजरअंदाज न करें और जीवन के लिए हमेशा बैकअप तैयार रखें।
पीवी सिंधू
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने युवाओं को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि खेल के साथ-साथ शिक्षा पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है। गुरुग्राम के एक कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ खेल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
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'पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते'
सिंधू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'आप पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते। एक समय आता है जब आपको रिटायर होना पड़ता है। लेकिन शिक्षा हमेशा आपके साथ रहती है।' उन्होंने यह भी बताया कि खेल करियर सीमित होता है, जबकि पढ़ाई जीवनभर काम आती है।
सिंधू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'आप पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते। एक समय आता है जब आपको रिटायर होना पड़ता है। लेकिन शिक्षा हमेशा आपके साथ रहती है।' उन्होंने यह भी बताया कि खेल करियर सीमित होता है, जबकि पढ़ाई जीवनभर काम आती है।
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खेल और पढ़ाई दोनों जरूरी
सिंधू ने जोर देकर कहा कि पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, 'कोई भी सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं होता। मेहनत पढ़ाई में भी जरूरी है और खेल में भी। दोनों बराबर महत्वपूर्ण हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने खुद एमबीए किया है और ट्रेनिंग के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था।
सिंधू ने जोर देकर कहा कि पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, 'कोई भी सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं होता। मेहनत पढ़ाई में भी जरूरी है और खेल में भी। दोनों बराबर महत्वपूर्ण हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने खुद एमबीए किया है और ट्रेनिंग के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था।
चोट से करियर पर खतरा
पीवी सिंधू ने बताया कि खेल में चोट कभी भी आ सकती है और यह करियर खत्म भी कर सकती है। उन्होंने कहा, 'स्पोर्ट्स बहुत रिस्की है। चोट कब लग जाए, पता नहीं चलता। उस समय आपको जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए।' उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे पढ़ाई को नजरअंदाज न करें।
पीवी सिंधू ने बताया कि खेल में चोट कभी भी आ सकती है और यह करियर खत्म भी कर सकती है। उन्होंने कहा, 'स्पोर्ट्स बहुत रिस्की है। चोट कब लग जाए, पता नहीं चलता। उस समय आपको जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए।' उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे पढ़ाई को नजरअंदाज न करें।
खुद के संघर्ष का उदाहरण
सिंधू ने 2015 का अपना अनुभव साझा किया, जब उनके पैर में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। इस चोट के कारण वह छह महीने तक खेल से दूर रहीं और 2016 ओलंपिक से पहले उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'उस समय मेरे मन में यह सवाल था कि क्या मैं दोबारा खेल पाऊंगी या नहीं।' हालांकि, उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता।
सिंधू ने 2015 का अपना अनुभव साझा किया, जब उनके पैर में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। इस चोट के कारण वह छह महीने तक खेल से दूर रहीं और 2016 ओलंपिक से पहले उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'उस समय मेरे मन में यह सवाल था कि क्या मैं दोबारा खेल पाऊंगी या नहीं।' हालांकि, उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता।
कोच गोपीचंद की सोच से सहमति
सिंधू ने अपने कोच पुलेला गोपीचंद की बातों से सहमति जताई, जो हमेशा खिलाड़ियों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने की सलाह देते रहे हैं। सिंधू का मानना है कि खेल और शिक्षा का संतुलन ही सफलता की कुंजी है। उनका संदेश साफ है कि खिलाड़ी अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पढ़ाई को नजरअंदाज न करें।
सिंधू ने अपने कोच पुलेला गोपीचंद की बातों से सहमति जताई, जो हमेशा खिलाड़ियों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने की सलाह देते रहे हैं। सिंधू का मानना है कि खेल और शिक्षा का संतुलन ही सफलता की कुंजी है। उनका संदेश साफ है कि खिलाड़ी अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पढ़ाई को नजरअंदाज न करें।
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