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'मुझे पद्मश्री क्यों नहीं मिला': ज्वाला गुट्टा ने किस पर साधा निशाना? कहा- PR का पता होता तो रील्स बनाती और...

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 21 May 2026 03:28 PM IST
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सार

भारतीय बैडमिंटन की पूर्व स्टार खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने एक बार फिर भारतीय बैडमिंटन सिस्टम और सम्मान देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ज्वाला ने कहा कि उन्हें आज तक पद्मश्री नहीं मिला, जबकि उन्होंने भारतीय डबल्स बैडमिंटन को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें पता होता कि पीआर इतना जरूरी है, तो वह “रील्स बनातीं और डांस करतीं।” ज्वाला ने सिस्टम में पक्षपात, खिलाड़ियों के चयन और अपनी अकादमी को समर्थन न मिलने को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।

‘Had I Known PR Was Important, I’d Have Made Reels And Danced’: Jwala Gutta Questions Padma Shri Snub
ज्वाला गुट्टा - फोटो : ANI
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विस्तार

भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने भारतीय खेल व्यवस्था और बैडमिंटन सिस्टम पर तीखा हमला बोला है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में ज्वाला ने कहा कि भारतीय बैडमिंटन पूरी तरह मोनोपोलाइज्ड हो चुका है और फैसले कुछ लोगों तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा, 'पूरा सिस्टम ही समस्या है। सब कुछ पूरी तरह मोनोपोलाइज्ड है। एक ही व्यक्ति सब कुछ तय करता है। मैं पिछले चार साल से कह रही हूं कि मेरी भी अकादमी है। मुझे अंडर-19 या सीनियर कैंप मत दीजिए, अंडर-13 या अंडर-15 खिलाड़ी दे दीजिए। बच्चे अच्छा खेलेंगे और फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।'
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'मेरी अकादमी के खिलाड़ी बागी कहलाते हैं'
ज्वाला ने दावा किया कि उनकी बेबाक छवि की वजह से उनकी अकादमी में ट्रेनिंग लेने वाले खिलाड़ियों को भी अलग नजर से देखा जाता है। उन्होंने कहा, 'जो भी ज्वाला गुट्टा अकादमी में ट्रेनिंग करता है, उसे ‘रेबेल’ यानी बागी कहा जाता है। यही मेरी छवि बना दी गई है।' ज्वाला ने बताया कि हैदराबाद में उनकी अकादमी देश की सबसे बड़ी बैडमिंटन अकादमियों में से एक है। उन्होंने कहा, 'मेरी अकादमी में 50 हजार स्क्वायर फीट में 14 कोर्ट हैं और मैंने यह सब अकेले बनाया है। फिर भी मुझे कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा।'
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'डबल्स बैडमिंटन को पहचान मैंने दिलाई'
14 बार की राष्ट्रीय चैंपियन ज्वाला गुट्टा का मानना है कि भारतीय डबल्स बैडमिंटन को पहचान दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर मैंने 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल नहीं जीता होता तो बैडमिंटन खिलाड़ियों को प्राथमिकता नहीं मिलती। आज जूनियर खिलाड़ियों को जो एक्सपोजर ट्रिप्स मिल रही हैं, वह उसी रास्ते की वजह से है जो मैंने डबल्स खिलाड़ी के तौर पर बनाया।'
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पद्मश्री नहीं मिलने पर छलका दर्द
ज्वाला ने पद्मश्री सम्मान न मिलने पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज खेलों में प्रदर्शन से ज्यादा पीआर और इमेज मैनेजमेंट मायने रखता है। उन्होंने कहा, 'मुझे पद्मश्री नहीं मिला। अगर मैं अपनी उपलब्धियां दिखाऊं तो लोग हैरान रह जाएंगे कि मुझे पद्मश्री क्यों नहीं मिला। मुझे क्यों नहीं मिला? क्योंकि मैंने पीआर नहीं किया। मैंने गरीबी और संघर्ष का रोना नहीं रोया, जबकि मैंने भी सब झेला है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमें सिखाया गया था कि अगर अच्छा प्रदर्शन करोगे तो बाकी चीजें खुद हो जाएंगी। मुझे नहीं पता था कि पीआर इतना जरूरी है। अगर पता होता तो मैं गानों पर डांस करती और रील्स बनाती।'

'महिला होने की वजह से बातें विवाद बन जाती हैं'
ज्वाला गुट्टा ने कहा कि खेलों में महिलाओं के साथ अलग व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा, 'अगर मैं साफ-साफ अपनी बात कहती हूं तो वह विवाद बन जाता है। पुरुष और महिला में फर्क है। अगर मैं बोलती हूं तो लोगों को पसंद नहीं आता।' उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने उनके लुक्स के आधार पर भी उन्हें जज किया। गुट्टा ने कहा, 'अगर मुझे बाल रंगना, पेडिक्योर और मैनीक्योर पसंद है तो लोग मान लेते हैं कि मैं गंभीर खिलाड़ी नहीं हूं। लेकिन इसमें मेरी गलती नहीं है।' अंत में ज्वाला ने कहा कि उन्हें अब भी समझ नहीं आता कि सरकार उन्हें क्यों नजरअंदाज करती है।
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