{"_id":"6a733a97605dc1f85b011f03","slug":"cwg-2026-yamini-maurya-reveals-how-she-missed-gold-medal-2026-08-05","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"CWG 2026: फोन पर गोल्ड का सपना सजाया, एक गलती ने सिल्वर पर ही रोक दिया; पदक विजेता यामिनी मौर्य का छलका दर्द","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
CWG 2026: फोन पर गोल्ड का सपना सजाया, एक गलती ने सिल्वर पर ही रोक दिया; पदक विजेता यामिनी मौर्य का छलका दर्द
Wed, 05 Aug 2026 07:23 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भिवानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भिवानी
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:23 PM IST
सार
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने वाली भारतीय जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने कहा कि उन्हें गोल्ड जीतने का पूरा भरोसा था, लेकिन फाइनल में एक गलती ने उनका सपना तोड़ दिया। उन्होंने माना कि अगर वह धैर्य रखतीं और जरूरत से ज्यादा आक्रामक नहीं होतीं, तो मुकाबले का नतीजा उनके पक्ष में हो सकता था।
विज्ञापन
यामिनी मौर्य
- फोटो : Yamini Mourya (X)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली भारतीय जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने फाइनल मुकाबले को याद करते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा था कि वह स्वर्ण पदक जीतेंगी। उन्होंने गोल्ड मेडल की तस्वीर अपने मोबाइल का वॉलपेपर तक बना ली थी, लेकिन एक छोटी-सी गलती ने उनका सपना अधूरा छोड़ दिया।
महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी का मुकाबला इंग्लैंड की एसेल्या टोपराक से हुआ। करीब सात मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में गोल्डन स्कोर के दौरान तीसरा शिडो मिलने के बाद उन्हें इप्पोन से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही टोपराक ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि यामिनी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन
महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी का मुकाबला इंग्लैंड की एसेल्या टोपराक से हुआ। करीब सात मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में गोल्डन स्कोर के दौरान तीसरा शिडो मिलने के बाद उन्हें इप्पोन से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही टोपराक ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि यामिनी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन
'मुझे पूरा विश्वास था कि गोल्ड मेरा ही होगा'
यामिनी ने एएनआई से बातचीत में कहा कि प्रतियोगिता से पहले उनका आत्मविश्वास चरम पर था। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास था कि मैं गोल्ड मेडल जीतूंगी। मैंने अपने फोन के वॉलपेपर पर भी गोल्ड मेडल की तस्वीर लगा रखी थी, क्योंकि मुझे यकीन था कि वह मेरा ही होगा। लेकिन एक गलती ने सब कुछ बदल दिया और परिणाम वैसा नहीं रहा जैसा मैंने सोचा था।'
तीसरे शिडो को बताया हार की सबसे बड़ी वजह
यामिनी ने स्वीकार किया कि फाइनल मुकाबले में जरूरत से ज्यादा आक्रामक होना उनके लिए भारी पड़ गया। उनका मानना है कि यदि वह थोड़ा धैर्य रखतीं और अपने खेल पर भरोसा करतीं, तो नतीजा अलग हो सकता था। उन्होंने कहा, 'मैंने फाइनल को चार-पांच बार अपने दिमाग में दोहराया। मुझे महसूस हुआ कि आखिरी शिडो ने सब कुछ बदल दिया। अगर मैं शांत रहती और ज्यादा आक्रामक नहीं होती तो शायद मुकाबला मेरे पक्ष में जाता। मुझे अपने खेल पर भरोसा रखना चाहिए था और प्रतिद्वंद्वी की गलती का इंतजार करना चाहिए था। आखिर में गलती मैंने कर दी। अगर मैं धैर्य बनाए रखती और अपनी आक्रामकता पर नियंत्रण रखती, तो मुझे लगता है कि मैं गोल्ड जीत सकती थी।'
यामिनी ने एएनआई से बातचीत में कहा कि प्रतियोगिता से पहले उनका आत्मविश्वास चरम पर था। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास था कि मैं गोल्ड मेडल जीतूंगी। मैंने अपने फोन के वॉलपेपर पर भी गोल्ड मेडल की तस्वीर लगा रखी थी, क्योंकि मुझे यकीन था कि वह मेरा ही होगा। लेकिन एक गलती ने सब कुछ बदल दिया और परिणाम वैसा नहीं रहा जैसा मैंने सोचा था।'
तीसरे शिडो को बताया हार की सबसे बड़ी वजह
यामिनी ने स्वीकार किया कि फाइनल मुकाबले में जरूरत से ज्यादा आक्रामक होना उनके लिए भारी पड़ गया। उनका मानना है कि यदि वह थोड़ा धैर्य रखतीं और अपने खेल पर भरोसा करतीं, तो नतीजा अलग हो सकता था। उन्होंने कहा, 'मैंने फाइनल को चार-पांच बार अपने दिमाग में दोहराया। मुझे महसूस हुआ कि आखिरी शिडो ने सब कुछ बदल दिया। अगर मैं शांत रहती और ज्यादा आक्रामक नहीं होती तो शायद मुकाबला मेरे पक्ष में जाता। मुझे अपने खेल पर भरोसा रखना चाहिए था और प्रतिद्वंद्वी की गलती का इंतजार करना चाहिए था। आखिर में गलती मैंने कर दी। अगर मैं धैर्य बनाए रखती और अपनी आक्रामकता पर नियंत्रण रखती, तो मुझे लगता है कि मैं गोल्ड जीत सकती थी।'
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कर रही हैं भारत का प्रतिनिधित्व
26 मार्च 1998 को मध्य प्रदेश के सागर में जन्मीं यामिनी मौर्य भारत की अनुभवी जूडो खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल, एशियाई चैंपियनशिप और आईजेएफ वर्ल्ड टूर जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2022 से वह लगातार अंतरराष्ट्रीय सर्किट में भारत के लिए पदक की दावेदार रही हैं और कई बार सीनियर नेशनल चैंपियन भी बन चुकी हैं।
जूडो में भारत का सर्वश्रेष्ठ कॉमनवेल्थ प्रदर्शन
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो की 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य सहित कुल चार पदक जीते। यह 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के तीन पदकों के प्रदर्शन से बेहतर रहा, जहां भारत को एक भी स्वर्ण नहीं मिला था। इस ऐतिहासिक अभियान में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने इतिहास रचते हुए भारत को जूडो में पहले कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक दिलाए। अस्मिता कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनीं, जबकि हर्ष सिंह ने पुरुष वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की।
पदक विजेताओं को मिला नकद पुरस्कार
भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने जूडो टीम को सम्मानित किया। सरकार की ओर से स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेता को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेता को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
26 मार्च 1998 को मध्य प्रदेश के सागर में जन्मीं यामिनी मौर्य भारत की अनुभवी जूडो खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल, एशियाई चैंपियनशिप और आईजेएफ वर्ल्ड टूर जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2022 से वह लगातार अंतरराष्ट्रीय सर्किट में भारत के लिए पदक की दावेदार रही हैं और कई बार सीनियर नेशनल चैंपियन भी बन चुकी हैं।
जूडो में भारत का सर्वश्रेष्ठ कॉमनवेल्थ प्रदर्शन
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो की 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य सहित कुल चार पदक जीते। यह 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के तीन पदकों के प्रदर्शन से बेहतर रहा, जहां भारत को एक भी स्वर्ण नहीं मिला था। इस ऐतिहासिक अभियान में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने इतिहास रचते हुए भारत को जूडो में पहले कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक दिलाए। अस्मिता कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनीं, जबकि हर्ष सिंह ने पुरुष वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की।
पदक विजेताओं को मिला नकद पुरस्कार
भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने जूडो टीम को सम्मानित किया। सरकार की ओर से स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेता को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेता को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।